गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। बिहार में भूमि राजस्व से संबंधित विभाग के कर्मचारी और अधिकारी गत कुछ वर्षों में ऐसे हो गए हैं कि बिना घूस, नजराना लिए आम जनता का कोई कार्य नहीं कर रहे हैं। गत वर्ष से बिहार में नया सर्वे की कार्यवाही शुरू होने के बाद किसान और रैयत राजस्व कर्मचारी से लेकर जिला मुख्यालय तक कार्यालय की दौड़ लगा रहे हैं।
बिहार में जमीन की जमाबंदी ऑनलाइन की गई, लेकिन जमाबंदी में करीब 90 प्रतिशत जमाबंदी में नाम या खेसरा खाता या रखवा की अशुद्धियां है। इसके सुधार करवाने के लिए रैयत राजस्व कर्मचारी से लेकर जिला स्तरीय कर्मचारी तक दौड़ लगा रहे हैं। जो रैयत पैसा खर्च कर रहे हैं उनका काम हो रहा है, अन्यथा गरीब रैयत अंचल से लेकर डीसीएलआर के कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं।
बिहार में भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी और अधिकारी के संबंध में बताया जाता है कि वे अब सीधे जनता से घुस नहीं लेते हैं। इसके लिए दलाल को बिठा रखा है और मजबूरन जनता को इन दलालों के चक्कर में पड़ना पड़ता है। बिहार में नई नीतिश सरकार के बनने के बाद उप मुख्यमंत्री सह भूमि राजस्व मंत्री विजय कुमार सिंहा राजस्व कर्मचारी और अंचल पदाधिकारी सहित सभी पदाधिकारी को राजस्व से संबंधित कार्य ईमानदारी पूर्वक करने की बात करते देखे जाते हैं।
बिहार में बहुत से लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों को राजस्व मंत्री द्वारा फटकार भी लगाया गया है और कई एक को सस्पेंड भी किया गया है। जिसको लेकर जहां आम जनता में भ्रष्टाचार से मुक्ति की आशा जगी है। लेकिन घूसखोरी पर जीने वाले कर्मचारी और अधिकारी मानने को तैयार नहीं है।
इस कड़ी में 6 जनवरी को निगरानी विभाग पटना की एक टीम ने वैशाली जिले के वैशाली अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी राजेश रौशन राम को दाखिल खारिज करने के एवज में ₹5000 घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
बताया गया है कि वैशाली अंचल के एक रैयत से दाखिल खारिज करने के नाम पर उक्त कर्मचारी कई दिनों से घूस में ₹10000 देने की मांग कर रहा था। बात ₹5000 पर तय हुई, जिसकी सूचना उक्त निगरानी विभाग को दी गयी। निगरानी विभाग ने मामले की जांच कर 6 जनवरी को विभाग की पुलिस टीम ने जाल बिछाकर अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी को ₹5000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
बताया जाता है कि गिरफ्तारी के बाद उक्त घूसखोर कर्मचारी को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए निगरानी टीम अपने साथ पटना ले गई। इस कार्रवाई से अंचल कार्यालय और जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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