पीयूष पांडेय/बड़बिल (ओड़िशा)। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 18 जनवरी को ओडिशा लोक सेवा आयोग (ओपीएससी) द्वारा आयोजित सहायक अनुभाग अधिकारी (एएसओएस) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर एक याचिका स्वीकार कर ली है।
उच्चतम न्यायालय का यह फैसला उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा ओपीएससी अधिसूचना का समर्थन करने के लगभग एक महीने बाद आया, जिसमें ओडिशा सचिवालय सेवा के ग्रुप बी पदों में 796 एएसओएस की भर्ती के लिए प्रक्रिया के हिस्से के रूप में 1,104 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली रजत मिश्रा की याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार, ओपीएससी और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया और उनसे चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा जब मामला दोबारा उठाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 22 दिसंबर को उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बीआर सारंगी और न्यायमूर्ति एमएस रमन की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश पीठ के 19 मई 2023 के आदेश को खारिज कर दिया, जिसने मेरिट सूची को रद्द कर दिया था। ओपीएससी को नए सिरे से मेरिट सूची बनाने का निर्देश दिया था।
ज्ञात हो कि, ओडिशा सचिवालय सेवा के ग्रुप बी में 796 एएसओएस की भर्ती के लिए ओपीएससी द्वारा 27 अगस्त 2022 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें कुल 1,48,888 उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए थे। ओपीएससी ने दस्तावेज़ सत्यापन और कौशल परीक्षण के लिए 1,104 उम्मीदवारों की एक मेरिट सूची अधिसूचित की थी, जो विज्ञापित रिक्तियों का लगभग 1.5 गुना था।
मामले में रजत मिश्रा और चार अन्य जो शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से नहीं थे, ने मेरिट सूची तैयार करने के लिए विभिन्न विषयों में कट-ऑफ अंक लागू करने को चुनौती दी थी। जिसके बाद न्यायमूर्ति एके महापात्र की एकल न्यायाधीश पीठ ने 19 मई 2023 को मेरिट सूची को रद्द कर दिया।
साथ हीं ओपीएससी को कुल अंकों के आधार पर एक नई सूची तैयार करने और दो महीने के भीतर उन्हें सूचित करने का निर्देश दिया। बाद में 31 जुलाई को न्यायमूर्ति महापात्र ने भी एक समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए रद्द करने के आदेश की पुष्टि की।
बताया जाता है कि कबिता जेना और सत्यब्रत नायक द्वारा दो अलग-अलग रिट अपील दायर की गईं, जो मेरिट सूची में शॉर्टलिस्ट किए गए याचिकाकर्ताओ में से थे। ओपीएससी द्वारा एक अन्य रिट अपील में एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी।
ओपीएससी ने तर्क दिया था कि उसके पास विषय-वार योग्यता अंकों या कुल योग्यता अंकों के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने की शक्ति है। इसमें कहा गया कि भर्ती परीक्षा के विज्ञापन में भी इसका उल्लेख किया गया था।
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