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सुहागिनों ने की हरिहरनाथ व् शिवशक्ति मंदिरों में अखंड सौभाग्य के लिए पूजा

हरियाली तीज पर भारी संख्या में बाबा हरिहरनाथ पर श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। श्रावण माह शुक्ल पक्ष की तृतीया एवं हरियाली तीज व्रत के अवसर पर 27 जुलाई को भारी संख्या में भक्तों ने सारण जिला के हद में बाबा हरिहरनाथ सहित विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक किया।

इस अवसर पर संध्याकालीन बेला में बाबा हरिहरनाथ का भव्य श्रृंगार दर्शन के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ आया। सुहागिनों ने आज अपने पति की लंबी आयु, सुख- समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए बाबा हरिहरनाथ, उमा महेश्वर एवं आप रुपी गौरी शंकर मंदिर में पूजा-पाठ की। कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवन साथी पाने और विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इस व्रत को करती देखी गई।

बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चन्द्र शास्त्री ने बताया कि मान्यता है कि श्रावण माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को देवी पार्वती की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए थे और माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म की कथा भी सुनाई थी। इसलिए इस व्रत का संबंध शिव-पार्वती के मिलन से है। यही कारण है कि मंदिर परिसर में स्थापित शिव-पार्वती की पूजा करनेवालों में आज महिलाओं की भीड़ ज्यादा दिख रही हैं।

बाबा हरिहरनाथ के रुद्राभिषेक के लिए 40 बुकिंग

एक अन्य जानकारी के अनुसार सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर मे 27 जुलाई को रुद्राभिषेक के लिए 40 बुकिंग की गयी। बाबा हरिहरनाथ मंदिर के पुजारी पंडित सदानंद पांडेय ने बताया कि आज 40 रुद्राभिषेक की बुकिंग हुई है। उन्होंने बताया कि औसतन प्रत्येक दिन 20 से 22 रुद्राभिषेक यहां मंदिर के गर्भगृह में संपन्न हो रहा है। बुकिंग ऑफिस के निकट नवग्रह देवताओं के मंदिर में भी महिलाओं की ही भीड़ पूजा करती देखी गई।मंदिर के बाहर पंक्तिबद्ध होकर जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु जाते दिखे।

बाबा हरिहरनाथ की जय जयकार से पूरा मंदिर परिसर गूंज रहा था। रविवार होने के कारण स्थानीय सूर्य मंदिर में कश्यप -अदिति पुत्र भगवान सूर्य की दिन भर पूजा होती रही। राम धुन से सम्पूर्ण वातावरण गुंजायमान रहा। संध्याकालीन बेला में लोकसेवा आश्रम स्थित भगवान सूर्य की आरती – पूजा संत विष्णुदास उदासीन (मौनी बाबा) एवं पुजारी अनिल झा ने पूरी की। इस अवसर पर भगवान सूर्य को मिष्ठान में खीर का भोग लगाया गया। वहीं प्रसाद सभी उपस्थित भक्तों के बीच वितरण किया गया। कहते हैं कि सूर्यदेव अपने सभी भक्तों के जीवन से विघ्न-बाधा रुपी कालिमा का हरण कर जीवन को उजाले से भर देते हैं।

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