पुनर्विवाह और स्त्री सम्मान की आवाज़ पर आधारित नाटक ध्रुवदेवी
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के निकटवर्ती वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर नगर के उत्सव भवन गांधी आश्रम में 19 जून को संस्कृत के कवि विशाखदत्त के नाटक ध्रुवदेवी का सफल मंचन किया गया। प्रस्तुत नाटक पुनर्विवाह और स्त्री सम्मान की आवाज़ पर आधारित था।
चर्चित रंग निर्देशक कुमार वीर भूषण के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ध्रुवदेवी का मंचन बाबू शिवजी राय मेमोरियल लाइब्रेरी के बैनर तले आयोजित किया गया था। नाटक का उद्घाटन नाटककार राकेश रंजन और लेखिका आरती स्मित ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर उक्त नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिला दर्शक पहुंची थी। इस ऐतिहासिक नाटक में प्राचीन गुप्त वंश के सम्राट रामगुप्त द्वारा युद्ध नहीं लड़कर संधि में अपनी विवाहता ध्रुवदेवी को शक प्रदेश के राजा शकराज के शिविर में संबंध बनाने के लिए भेज दिया जाता है। ध्रुवदेवी शिविर में शकराज का वध कर अपनी अस्मिता बचाती और शक प्रदेश की रानी भी बन जाती है। कायर और क्लीक रामगुप्त शक प्रदेश में भी राज्य के लालच में पहुंचता है, लेकिन उसको मौत ही मिलती है और ध्रुवस्वामिनी की दूसरी शादी होती है।

पुनर्विवाह और स्त्री के सम्मान की आवाज़ ही प्रस्तुत नाटक का केंद्र था। नाटक के मंचन में ध्रुवस्वामिनी की किरदार में मुस्कान का अभिनय स्वाभाविक और असरदार था। जबकि, रामगुप्त का किरदार सतेन्द्र बगासी, चंदगूप्त का किरदार सत्यम कुमार झा, मंदाकिनी की किरदार सोनम वर्मा, शिखर स्वामी का किरदार कर्नल कुमार और खड्गधारणी के किरदार में अंजू चौबे ने अपने अपने चरित्रों के साथ खूब जमें।
खलनायक शकराज की भूमिका में कुमार दीनबंधु कुमार, कोमा की भूमिका में सुष्मिता, पुरोहित की भूमिका में शिवम् यादव ने चरित्रों की बारीकियों को पकड़ कर अभिनय किया।
नाटक में दर्शकों को हिजड़ा बने दीपक गुप्ता, कुबड़ा बने भाग्येश कौशिक, प्रतिहारी शिव शम्भू, दासी मीनू राठी, सैनिक मंशा शर्मा, खींगल शाहान अहमद और शक सामंत दीपक सिद्धार्थ, नवनीत कुमार बहुत पसंद आए। नाटक की सफलता में मंच से परे संजय दास का प्रकाश परिकल्पना, कर्नल का संगीत, अर्चना कुमारी का मुख सज्जा, सुजीत कुमार तथा शिवम झा के सेट ने बड़ी भूमिका निभाई है।
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