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देश के संघीय ढांचे पर हमले के खिलाफ तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए हड़ताल-मोर्चा

प्रहरी संवाददाता/बोकारो। ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा बोकारो के तत्वावधान में जिला मुख्यालय सेक्टर थ्री एटक कार्यालय हॉल में 6 जुलाई को एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया।

सात सदस्यीय अध्यक्ष मंडली द्वारा आगामी 9 जूलाई की देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जब दुनिया कोरोना जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहा था, उस समय वर्ष 2020 को मजदूर विरोधी, उद्योग विरोधी, जनविरोधी केंद्र की मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एवं निजी मालिकों के हित में मजदूरों के लम्बे संघर्षों और शहादतों के बल पर 44 श्रम कानून का अधिकार प्राप्त किया था, उसके स्थान पर चार लेबर कोड बिल को पारित कर लिया।

कहा गया कि दो बैसाखियों पर खड़ी यह केंद्र की भाजपा सरकार अधिसूचना जारी कर चार लेबर कोड्स को लागू करने जा रही है। यदि चार लेबर कोड्स लागू हो गया तो जिस स्थिति में वेतन है, वह नहीं रह पाएगा। मजदूरों का सभी प्रकार के अधिकार समाप्त हो जाएगा। जैसे 8 घंटा के बदले 12 घंटा काम लिया जाएगा। वेतन समझौता का अधिकार, बोनस का अधिकार, अपनी मांग रखने, हड़ताल करने, मजदूर संगठन बनाने, सारा का सारा अधिकार समाप्त हो जाएगा।

फिक्स टर्म जॉब यानि काम के घंटा पर अधारित वेतन दिया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा, मैटरनिटी लीव, चाइल्ड केयर लीव सब समाप्त कर दिया जाएगा। 18000 रुपए से अधिक वेतन पाने वाले कर्मियों को मजदूर की परिभाषा से हटा दिया जाएगा। ऐसे कर्मी अब न तो मजदूर होगा न ही अधिकारी।
कहा गया कि असंगठित क्षेत्र के मजदूर 44 कोड्स वाली श्रम कानून के दायरे में आने का जो आंदोलन कर रहा है, वह भी रुक जाएगा।असंगठित क्षेत्र के मजदूर की स्थिति और भी बद से बद्तर हो जाएगी।

कहा गया कि सेल में कार्यरत मजदूरों का वेतन समझौता आज भी आधा अधुरा है। 39 महीने का एरियर आज तक बकाया है। ग्रेच्युटी पर सीलिंग लगा दिया गया है। पर्कस का एरियर भी नहीं मिला है। इसलिए देश के मजदूरों के साथ सेल बोकारो के मजदूरों ने भी यह फैसला लिया है कि हम मजदूर वर्ग सरकार की इस मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स को लागू नहीं होने देंगे। कहा गया कि जब-जब मजदूरों पर पूंजीपतियों के निर्देश से हमला हुआ है, श्रमिक संगठन आगे बढ़कर माकूल जवाब देने का काम किया है।

वक्ताओं ने कहा कि आप सभी यह भी जानते हैं कि वर्ष 2022 में मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने कॉर्पोरेट के पक्ष में किसानों को गुलाम बनाने वाली तीन कृषि कानून को संसद में पास करा लिया था। किसानों का संयुक्त मोर्चा ने जिसे श्रमिक संगठन का समर्थन प्राप्त था, एक साल से अधिक दिनों तक, जिसमें सात सौ से अधिक किसान शहीद हो गये थे, आंदोलन कर मोदी सरकार को घुटने टेका दिया। बाध्य होकर तीनों काले कृषि कानून को संसद में निरस्त करना पड़ा। अब हम मजदूर वर्ग की बारी है।

हम सब मजदूर अपनी चट्टानी एकता को प्रदर्शित करते हुए यह संकल्प लें, कि मजदूरों को गुलाम बनाने वाली चार लेबर कोड रद्द करो सहित आम जनता से जुड़ी 17 सूत्री मांगों को लेकर देश के श्रमिक संगठनों द्वारा आगामी 9 जुलाई को अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करें।

सभा को एटक के महामंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह, सीटू महामंत्री बी डी प्रसाद, इंटक उपाध्यक्ष बी एन उपाध्याय, एक्टू महामंत्री देवदीप सिंह दिवाकर, एआईयूटीयूसी महामंत्री मोहन चौधरी, एचएमएस महामंत्री आर के वर्मा, झारखंड मजदूर यूनियन महामंत्री डी सी गोराई ने मुख्य रूप से संबोधित किया। इसके अलावा आई डी प्रसाद, शशि कान्त सिन्हा, जे एन सिंह, कुमार सत्येन्द्र, राजेश ओझा, देवाशीष पाल, सुभाष प्रमाणिक, अबु नसर, एस कुमार, आर के गोराई, कुमुद महतो, आर एन सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त करते हुए सम्मेलन को संबोधित किया।

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