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खुद विकलांग है झारखंड में राज्य निःशक्त आयोग-ओमप्रकाश चौहान

एक साल से अधिक से धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड में आज खुद विकलांग बनकर रह गया है। राज्य निःशक्त आयोग। विकलांगो को न तो न्याय और न हीं रोजगार देने में सक्षम है निःशक्त आयोग।

उक्त बातें झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश चौहान ने राजधानी रांची के लोकभवन के समीप एक भेंट में कही। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष से अधिक समय से वे राज्य के बिकलांगो को न्याय, समानता का अधिकार तथा रोजगार देने की मांग से लोकभवन के समीप धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, बावजूद इसके अभीतक किसी ने भी उनकी सुधि तक लेने की जरूरत नहीं समझी है। उन्होंने बताया कि वे अपने 16 सूत्री मांगो को लेकर बीते वर्ष 16 जुलाई 2024 से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

कहा कि राज्य सरकार द्वारा आरपीडब्ल्युडी अधिनियम के तहत राज्य के दिव्यांगजनों को समानता का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। लोकभवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर रहे ओमप्रकाश चौहान मुल रूप से धनबाद जिला के हद में बाघमारा रहिवासी है। कड़कड़ाती ठंढ में भी उनका हौसला दिव्यांगजनों के अधिकारों को दिलाने को लेकर बरकरार है।

उन्होंने कहा कि राज्य में निःशक्त आयोग पुरी तरह खुद भी बिकलांग होकर रह गया है। उन्होंने मांग की कि आयोग का अध्यक्ष पद पर किसी बिकलांग को बैठाने की जरूरत है, ताकि निःशक्तों की परेशानी को समझ सके। उन्होंने कहा कि राज्य के निःशक्त, विधवा, वृद्धजनों व् बिकलांगो को मइंया सम्मान योजना के समान सरकार कम से कम प्रतिमाह ₹2500 (ढाई हजार) सम्मान राशि दे। साथ हीं उपरोक्त को रोजगार से जोड़ा जाये तथा समान अधिकार देना चाहिए, ताकि निःशक्त भी राज्य में समान रूप से जी सके।

धरना-प्रदर्शन में शामिल रांची जिला के हद में सिल्ली रहिवासी संघ के कोषाध्यक्ष जिन्हा महतो के अनुसार वे इस आंदोलन में शुरु से जुड़ी है। कहा कि जबतक निःशक्तों को न्याय नहीं मिल जाता है तबतक वे आंदोलनरत रहेगी। कहा कि अपने हक अधिकार के लिए वे राज्य के राज्यपाल व् मुख्यमंत्री से भी मुलाक़ात कर चुकी है, बावजूद इसके अबतक कहीं से भी न्याय नहीं मिला है। संघ के मीडिया प्रभारी कांके रहिवासी एहतेशाम परवीन के अनुसार झारखंड सरकार के समाज कल्याण सचिव मनोज कुमार पूर्व में चुनाव को लेकर टालमटोल की नीति अपनाते रहे है।

बाद में कहा गया कि समाज कल्याण मद की राशि का दूसरे मद में उपयोग होने की बात कह विभाग के पास फंड नहीं रहने का रोना रो रहे हैं। वहीं धरना-प्रदर्शन में शामिल कोकर तालाब झील रहिवासी 40 वर्षिया महिला समुंदरी देवी पति द्वारा दूसरी महिला को लेकर उनके साथ कई बार मारपीट कर घर से दो वर्ष पुर्व निकाल दिए जाने का रोना रो रही है।

पीड़िता के अनुसार वे फरियाद को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री द्वारा उसे कहा गया कि उसके आवेदन को संबंधित थाना में कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। बावजूद इसके थाना द्वारा न तो उसे आवेदन की पावती दी गयी है और न हीं कार्रवाई की गयी है। ऐसे में वह घुटघुटकर जीवन जी रही है।

 

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