गजेंद्र मोक्ष देवस्थानम में मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

बाल कृष्ण लड्डू गोपाल जे जन्मोत्सव पर जुटे हजारों श्रद्धालु

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर स्थित प्रसिद्ध श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् में धूमधाम से बालकृष्ण लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। यहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का दर्शन कर भाव विह्वल हो गये।

दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने 7 सितंबर को सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित नौलखा मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर अपने प्रवचन में कहा कि श्रीकृष्ण सर्वोत्तम परमात्मा हैं। रानी रुक्मणी भगवान कृष्ण की पत्नी थी। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का केंद्रीय संदेश मनुष्य के लिए इच्छा रहित कर्म में भाग लेना था।

जो मानव अहंकार से नहीं बल्कि, दैवी उद्देश्य से प्रेरित हो।उन्होंने इसे स्वयं अपने जीवन में अपनाकर रहिवासियों को कर्म करने की शिक्षा दी। देवस्थानम में संध्या कालीन बेला में आरती के पश्चात भगवान श्रीबालाजी वेंकटेश, श्रीदेवी, भू देवी, लड्डू गोपाल की मनोहारी झांकी का भक्तों ने दृश्यावलोकन किया। पूरा मंदिर परिसर इस दौरान नन्द को आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की भजन से गूंज रहा था।

इस विशेष अवसर पर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार लेने के उद्देश्य को विस्तार से बताया। स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण का केंद्रीय संदेश मनुष्य के लिए इच्छा रहित कर्म में भाग लेना था, जो मानव अहंकार से नहीं, बल्कि दैवीय उद्देश्य से प्रेरित हो। इस तरह भगवान कृष्ण सर्वोच्च भगवान बन गए।

उन्हें पूरी दुनिया का निर्माता माना जाता है। उनका जन्म भयानक शासकों और राजाओं से मानवता को बचाने के लिए हुआ था। लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण, भगवान श्रीमन्नारायण अर्थात श्रीहरि विष्णु के अवतार थे। उन्होंने बताया कि कृष्ण की पहचान अंततः सर्वोच्च भगवान विष्णु नारायण के साथ की गई, इसलिए उन्हें उनका अवतार माना गया। उनकी पूजा में विशिष्ट लक्षण संरक्षित थे। उनमें से प्रमुख दिव्य प्रेम और मानव प्रेम के बीच समानता की खोज थी।

स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा में हुआ था। उनके अवतार माता देवकी और पिता वासुदेव थे। द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसों के जघन्य पापों का बोझ था। विशेषकर देवकी के भाई कंस का। उस अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान श्रीविष्णु ने धरती माँ को आशीर्वाद दिया, जिन्होंने उनका आशीर्वाद माँगा था और श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बाल लीला में कई अत्याचारी की लीला समाप्त कर दी। बड़े होकर अपनी युवावस्था में भगवान कृष्ण मथुरा में अत्याचारी राजा अपने मामा कंस को मार डाला। इसके बाद कंस के पिता उग्रसेन को मथुरा का राजा बना दिया। लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता से विचार करने के लिए कई श्लोक हैं, जो साबित करते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण सर्वोत्तम परमात्मा हैं और रानी रुक्मणी भगवान कृष्ण की पत्नी थीं।

इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मन्दिर को सुन्दर ढंग से सजाया गया था। बीते 6 सितंबर की अर्ध रात्रि बारह बजे तक संगीतमय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मन्दिर प्रबंधक नन्द कुमार ने बताया कि आज देवस्थानम् में भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष, श्री बालाजी वेङ्कटेश, श्रीदेवी, भू देवी, श्रीमहालक्ष्मी और अल्वार विग्रह सभी को विभिन्न रसायन एवं दिव्य जल से अभिषेक कर वस्त्राभूषण, सुगन्धित पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया।

शाम साढ़े पांच बजे संध्या आरती के बाद भगवान श्रीबालाजी वेङ्कटेश, श्रीदेवी, भू देवी, लड्डू गोपाल दोलारूढ़ कर दर्शनीय रखा गया। मध्य रात्रि ठीक बारह बजे बालकृष्ण लड्डू गोपाल की मनोहारी झांकी दृश्यों के साथ स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने नन्द को आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की गाते हुए आनन्दोत्सव मनाया।

इस खास अवसर पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया और महाप्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर मन्दिर मीडिया प्रभारी समाजसेवी लाल बाबू पटेल, ज्योतिषाचार्य पंडित नन्द किशोर तिवारी, दिलीप झा, फूल झा, संजय सिंह, रमाकांत सिंह, भोला सिंह, गोपाल सिंह सहित हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।

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