संभव है सभी बीमारियों का इलाज- डॉ. वर्मा
मुश्ताक खान/ मुंबई। हमेशा विवादो में रहा मनपा का सायन हॉस्पिटल (Sion Hospital) इस दिनों विभिन्न विशेषताओं के कारण सुर्खियों में है। इस हॉस्पिटल में हर तरह का इलाज किफायती दरों पर संभव है। करीब 6 दशक से चल रहे 1750 बेडों वाले इस हॉस्पिटल में एशिया महादेश का सबसे हाई वॉल्यूम ट्रामा सेंटर (High volume Trama center) है। इसके अलावा मदर मिल्क बैंक (Mother Milk Bank) और स्क्रीन बैंक (Screen Bank) भी है।
इस हॉस्पिटल में करीब 250 मरीज हर रोज एडमिट होते हैं और लगभग इतने ही डिस्चार्ज भी होते हैं। यह जानकारी हॉस्पिटल के (डिप्टी डीन) उप अधिष्ठा डॉ. राकेश वर्मा (Dr. Rakesh verma) ने दी, उन्होंने कहा की मनपा के उपनगरीय हॉस्पिटलों में सबसे व्यस्त सायन हॉस्पिटल को ही माना जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार देश की आर्थिक राजधानी महानगर मुंबई के सायन में स्थित लोकमान्य तिलक महानगपालिका सर्वसाधारण रुग्णालय व वैधकीय महाविद्यालय का इतिहास बड़ा ही निराला है। करीब 6 दशक पूर्व भारतीय सेना के लिए बने महज 40 बेडों के इस हॉस्पिटल में अब 1750 बेड हैं और मौजूदा समय में यहां मुंबई के सर्वसाधारण लोगों का हर तरह का इलाज किफायती दरों पर होता है।
सायन हॉस्पिटल में हर रोग के अनुभवी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों का बड़ा दल है। इस हॉस्पिटल में करीब एक हजार अनुभवी डॉक्टर्स और करीब 300 उनके सहायक डॉक्टर्स हैं, जो दिन रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। इसी तरह नर्सिंग स्टाफ, सफाईकर्मी और अन्य कर्मचारियों की संख्या करीब दो हजार से अधिक है। इसके बावजूद लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या के मुकाबले इसे नाकाफी बताया जा रहा है।
एक सवाल के जवाब में डिप्टी डीन डॉ. राकेश वर्मा ने बताया की मौजूदा समय में मरीजों की समस्याओं को देखते हुए सिंगल विंडो योजना शुरू की गई है। ताकि मरीजों को किसी प्रकार का भुगतान आदि के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने बताया की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस हॉस्पिटल में लगभग हर तरह के मरीज आते हैं।
डॉ. वर्मा ने बताया की सायन हॉस्पिटल में ज्येष्ठ नागरीकों के लिए विशेष खिड़कियां बनाई गई है, ताकि किसी भी बुजुर्ग को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। इसके बावजूद मुंबईकरों द्वारा कई बार तोड़-फोड़ व डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
उन्होंन बताया की यहां की घनी आबादी वाले अंटॉप हिल, धारावी, सायन, शिवाजीनगर आदि स्लम इलाके के लोगों की नासमझी के कारण कभी कभार ऐसा होता है। उन्होंने बताया की इस हॉस्पिटल में कल्याण, डोंबिवली, विरार, उल्हासनगर, पनवेल आदि से भी मरीज अपना इलाज के लिए आते हैं। लेकिन वो इस तरह झगड़े पर उतारू नहीं होते।
बहरहाल ऐसी घटनाओं से बचने के लिए मौजूदा समय में हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हजारो वर्ग मीटर में फैले इस हॉस्पिटल में मरीजों की सहूलतों को देखते हुए हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा कई तरह के नये कदम उठाए गए हैं। इनमें हॉस्पिटल सहित मरीजों की सुरक्षा को अहमियत दी गई है। ताकि इस हॉस्पिटल की गरीमा बरकरार रहे।
इसके बाद भी मरीजों के परिजनों को हॉस्पिटल प्रबंधन से शिकायत रहती है। डॉक्टर वर्मा ने बताया की यहां हर तरह के मरीज को इंफेक्शन से दूर रखने की कोशिश की जाती है। ताकि उसे आराम मिले और जल्द से जल्द स्वस्थ्य हो सके। लेकिन यहां मरीजों से मिलने व उनके साथ रहने के मामले को लेकर लोग लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। जो कि किसी भी मरीज के स्वस्थ के लिए ठीक नहीं है।
डॉ. वर्मा के अनुसार इस हॉस्पिटल में हर रोज करीब 45 से 50 इमरजेंसी मरीज आते हैं, ऐसे मरीजों के लिए हमारा इमरजेंसी वार्ड है जहां हर समय अनुभवी चिकित्सकों का दल मौजूद रहता है। उन्होंने बताया की कई बार लोग निजी अस्पतालों से परेशान होने के बाद सायन हॉस्पिटल में अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। इनमें क्रिटिकल और ऐक्सीडेंटियल केस भी होते हैं।
उन्होंने कहा की हमारे यहां जितने भी डॉक्टर हैं सभी की कोशिश होती है कि वे मरीजों का बेहतर से बेहतर इलाज करे। एक अन्य सवाल के जवाब में डॉ. वर्मा ने कहा की यहां शुगर और डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखि जा रही है। कुछ ऐसी ही स्थिती कैंसर के मरीजों की भी है।
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