पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय में तालाबंदी से सड़क पर छात्र और शिक्षक
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर विधानसभा क्षेत्र के वाशिंदों व मतदाताओं के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा रेलवे परिसर में स्थित डिग्री कॉलेज पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय है जो अपनी स्थापना के 47 वर्षों के उपरांत भूमि और भवन से बेदखल कर दिया जा चुका है। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी सड़क पर फांकाकशी कर रहे हैं। नामांकित छात्र – छात्राओं को रोड पर भटकना पड़ रहा है।
अबतक सरकार की ऐसी शिक्षण व्यवस्था न कभी किसी ने देखी होगी और न कभी सुनी होगी। यहां की उच्चतर शिक्षा बेपटरी हो चुकी है।इससे शिक्षक – छात्र और अभिभावक सभी उद्वेलित हैं। हो भी क्यों नहीं, आज यहां की उच्चतर शिक्षा सड़क पर है। इस कॉलेज के भविष्य के बारे में रेल मंत्री और मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव ने भी कुछ नहीं किया। रेल मंत्री रहते नीतीश कुमार भी रेलवे कॉलेज का उद्धार नहीं कर सके। सत्ता पक्ष और विपक्ष की सोच एक जैसी रही है।कहा तो यह भी जाता है कि इस उच्चस्तरीय शिक्षण व्यवस्था को जंगलराज और सुशासन दोनों सरकारों की नजर लग गयी है। दोनों ने ही विपक्ष में रहकर बड़े -बड़े वादे किए, पर सत्ता में जाते ही कॉलेज को बिसरा दिया।
महाविद्यालय को खाली कराने की कार्रवाई को रेल ने बताया था उचित
पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय सोनपुर को खाली कराने की कार्रवाई को रेल प्रशासन ने पूर्णतः विधि सम्मत और उचित बताते हुए कहा था कि रेलवे स्टेशन से सटे उत्तर दिशा में रेलवे की स्वामित्व वाली भूमि एवं परिसर में वर्ष 1978 से बिना किसी समझौते के अनधिकृत रूप से संचालित किया जा रहा था। रेलवे प्रशासन ने सोनपुर रेलवे स्टेशन के विस्तार और रेल उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उक्त भूमि एवं परिसर का उपयोग करना अपरिहार्य माना था। इस बीते 18 मार्च को महाविद्यालय के सात कमरों को नियमबद्ध तरीके से सील किया गया।
साइबर कैफे में हो रहा कॉलेज का संचालन व सैलून में कट रहा रसीद
कहने सुनने में यह आश्चर्य किंतु सत्य है कि वर्तमान में उक्त कॉलेज का संचालन यहां के साइबर कैफे में हो रहा। वहीं स्थानीय एक सैलून में रशीद काटा जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे कॉलेज के चतुर्थवर्गीय रेल कर्मचारी अरविंद कुमार इन दिनों आर्थिक स्थिति से लाचार और बीमार हैं। वे बताते हैं कि अभी हाल यह है कि महाविद्यालय का सभी कार्य सोनपुर थाना एवं डाकघर के निकट स्थित साइबर कैफे एवं दाढ़ी बाल बनानेवाले सैलून से संचालित हो रहा है।
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि साइबर कैफे में प्राचार्य वगैरह और कर्मचारी बैठकर कॉलज के कार्यों का संचालन कर रहे हैं, जबकि सैलून में कॉलेज का रशीद कट रहा है। यह असुरक्षित है और कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है। कॉलेज तदर्थ समिति का कॉलेज के बंद होने की फिक्र नहीं है। वर्तमान में समिति ने कॉलेज बंदी के सवाल पर एक बार भी डीआरएम से बातचीत नहीं की कि कैसे कॉलेज का संचालन हो। यही नहीं समिति की निष्क्रियता की वजह से बीते 10 माह से कॉलेज कर्मियों को वेतन नहीं मिला है। इंटर का अनुदान दिसम्बर 2024 में आया वह नहीं बंटा। 4 -5 वर्ष पूर्व डिग्री का अनुदान डेढ़ करोड़ आया। उसके बाद भी आया है। आज तक नहीं बंटा। कर्मचारी बीमार होकर मर रहे हैं, पर समिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

वे बताते हैं कि कॉलेज में पांच सदस्यीय तदर्थ समिति है जिसके अध्यक्ष जन सुराज पार्टी के एमएलए अफाक अहमद हैं। छपरा स्थित गंगा सिंह कॉलेज के प्राचार्य प्रवेंद्र रंजन सचिव हैं जबकि कॉलेज का डोनर डीआरएम सोनपुर सदस्य, कॉलेज का प्राचार्य पदेन सदस्य, सोनपुर के अनुमंडल पदाधिकारी सदस्य हैं। सच कहिए तो समिति की लापरवाही से कॉलेज में आज ताला लगा है।
कर्मचारियों को महीनों से न वेतन मिल पाया है न अनुदान की राशि का भुगतान
पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय के अवकाश प्राप्त वरीय लिपिक सह शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री रहे महेश्वर नारायण सिंह कहते हैं कि अभी स्थिति ऐसी है कि न कॉलेज तदर्थ समिति की बैठक हो पा रही है, न छात्र-छात्राएं आ रहे है। सभी कमरों, प्रयोगशालाओं सहित कॉलेज के दोनों गेट पर ताला लटक रहा है।
कॉलेज प्रशासन भी है बंदी के लिए जिम्मेवार
पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय सोनपुर के अवकाश प्राप्त प्रधान लिपिक सुनील कुमार जो पिछले फरवरी मैब में ही रिटायर हुए हैं, उन्होंने कहा कि रिटायर होने के बाद भी उन्हें छह माह का बकाया वेतन अभी तक नहीं मिला है। इसी तरह कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से इंटर एवं डिग्री का अनुदान भी अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कॉलेज कमिटी को डीआरएम से मिलकर छात्र हित में कॉलेज का ताला खोलने का आग्रह करना चाहिए था जो नहीं किया गया। रोड पर कार्यालय चल रहा है। विगत 9 माह से शासी निकाय की बैठक नहीं हुई जिससे कर्मचारियों की स्थिति दयनीय है।
कॉलेज में तालाबंदी इस क्षेत्र की ज्वलंत समस्या
पूर्वोत्तर रेलवे महाविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रधान लिपिक सह लेखापाल रघुबर गिरि कहते हैं कि सोनपुर अनुमंडल का एक मात्र इकलौता डिग्री कॉलेज है। कॉलेज में तालाबंदी इस क्षेत्र की ज्वलंत समस्या है। कारण कि किसी पॉलिटीशियन ने यहां की समस्या के निदान के लिए कभी अथक प्रयास नहीं किया। कहा कि मैं और मेरी पत्नी कैंसर और हार्ट की बीमारी से ग्रसित है। इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। अभी तक मेरा अनुदान का लगभग 25 लाख रुपया बकाया है। जबकि मैं 2018 के सितंबर माह में ही रिटायर कर गया।
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