छोटे रिटेलर्स ने अनिवार्य लाइसेंसिंग आदेश पर जताया विरोध

एस.पी.सक्सेना/बोकारो। बोकारो के छोटे रिटेलर्स ने झारखंड सरकार (Jharkhand government) के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग के आदेश पर कड़ा विरोध जताया है।

छोटे रिटेलर्स ने नए कानून से बोकारो के 15 हजार से ज्यादा छोटे रिटेलर्स और उनके परिवार समेत 80 हजार से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित होने का दावा किया है।

बोकारो में तंबाकू उत्पाद बेचने वाले 15 हजार से ज्यादा दुकानदारों, छोटे रिटेलर्स और पानवाला का प्रतिनिधित्व करने वाले बोकारो स्टील सिटी रिटेलर्स एसोसिएशन ने झारखंड सरक के शहरी विकास विभाग द्वारा बीते वर्ष 1 दिसंबर को जारी आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें शहर में पान,आदि।

बीड़ी, सिगरेट आदि जैसे तंबाकू उत्पाद बेचने वाले रिटेलर्स के लिए अलग लाइसेंस अनिवार्य करने की बात कही गई है। आदेश में ऐसे लाइसेंसशुदा दुकानदारों के लिए अपनी दुकान में बिस्कुट, सॉफ्ट ड्रिंक, मिनरल वाटर आदि जैसी रोजाना की वस्तुएं बेचना भी प्रतिबंधित किया गया है।

यदि शहर में तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस को अनिवार्य किया गया तो छोटे रिटेलर्स की आजीविका पर दुष्प्रभाव पड़ेगा और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।

बोकारो स्टील सिटी रिटेलर्स एसोसिएशन (Bokaro Steel City Retailers association) का मानना है कि ऐसे कदमों से ज्यादातर अशिक्षित छोटे रिटेलर्स को प्रवर्तन अधिकारियों के हाथों उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा, जिससे लाइसेंस राज की वापसी होगी।

इससे कोविड महामारी के कारण पहले से ही नुकसान का सामना कर रहे रिटेलर्स के लिए कारोबार की लागत तेजी से बढ़ेगी। छोटे रिटेलर्स अपने आसपास रोजाना की जरूरत की चीजों जैसे बिस्कुट, सॉफ्ट ड्रिंक, मिनरल वाटर, सिगरेट, बीड़ी, पान आदि की बिक्री कर अपनी आजीविका चलाते हैं।

लॉकडाउन से पहले उनकी कमाई 4,000 से 6,000 रुपये महीना होती थी। जिससे बमुश्किल इनके परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था। महामारी के कारण उनकी कमाई पहले ही बहुत कम हो गई है। प्रस्तावित कानून से कमाई में 60 से 70 प्रतिशत की और कमी हो जाएगी, जो इनके लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

एसोसिएशन ने तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग वाले इस आदेश को वापस लेने के लिए चास नगर निगम के मेयर व निगम आयुक्त से अपील की है और इस आदेश के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है। इस कानून से शहर में 15 हजार माइक्रो रिटेलर्स पर प्रभाव पड़ेगा, जो शहर में उनके परिवार समेत 80 हजार से ज्यादा लोगों की आजीविका का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस संबंध में 6 जनवरी को बोकारो स्टील सिटी रिटेलर्स एसोसिएशन के सचिव कालीचरण मुखर्जी ने कहा कि बोकारो में, देश की अन्य जगहों की तरह, तंबाकू उत्पादों का खुदरा व्यापार पारंपरिक रूप से हजारों छोटे दुकानदारों के हाथों में रहा है, जो असंगठित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और छोटी दुकानों से संचालन करते हैं।

इन खुदरा विक्रेताओं को लॉकडाउन के कारण काफी नुकसान हुआ है। वे अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे निराशाजनक समय में यह देखकर चकित हैं कि झारखंड के शहरी विकास विभाग ने छोटे रिटेलर्स का सहयोग करने के बजाय एक ऐसा आदेश जारी किया है, जो हाशिए पर जी रहे रिटेलर्स का उत्पीड़न कई गुना बढ़ाएगा और व्यापार करने की लागत बढ़ाकर उन्हें बहुत बड़ा झटका देगा।

उनकी दुकान पर दैनिक प्रयोग की वस्तुओं की बिक्री प्रतिबंधित करते हुए यह नया कानून उनकी रोजाना की आय भी कम करेगा। उन्होंने बताया कि यह समय छोटे और सीमांत रिटेलर्स को राहत प्रदान करने का है। वे नगर निगम से अनुरोध करते हैं कि इस प्रस्तावित नियम को लागू न करे। इसके बजाय ऐसी नीतियां बनाएं जो हमारे सदस्यों के लिए आजीविका के अवसरों का निर्माण कर सकें।

उन्होंने कहा कि छोटे रिटेलर्स बोकारो में खुदरा बिक्री की रीढ़ हैं। उन्होंने महामारी के बीच उपभोक्ताओं तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं की पहुंच सुनिश्चित की है। ये रिटेलर्स तंबाकू उत्पाद बेचने के अलावा आसपास के लोगों की मांग के अनुरूप दैनिक जरूरतों का सामान जैसे बिस्कुट, सॉफ्ट ड्रिंक, मिनरल वाटर, सिगरेट, बीड़ी आदि भी बेचते हैं।

इससे उनकी आय कुछ बढ़ जाती है। नतीजतन, तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों के लिए अनिवार्य लाइसेंस के किसी भी कानून से शहर के इस गरीब वर्ग पर दूरगामी दुष्परिणाम होगा। उन्होंने कहा कि एक बड़ी आबादी के आय सृजन में अत्यधिक योगदान देने के बावजूद छोटे रिटेलर्स को कोविड के कारण लगे लॉकडाउन से बहुत नुकसान हुआ।

आज भी इन छोटी दुकानों का कामकाज पूरी तरह पटरी पर नहीं आया है। वे कोरोना से पहले की तुलना में केवल आधा ही कमा रहे हैं। ये रिटेलर्स विज्ञापन निषेध और व्यापार व वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण के नियमन अधिनियम, 2003, सीओटीपीए और इसके तहत नियमों के कारण पहले से ही प्रवर्तन अधिकारियों के हाथों दैनिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।

उनकी खराब शैक्षिक पृष्ठभूमि और जागरूकता की कमी का लाभ उठाते हुए कानूनों की गलत व्याख्या करते हैं। चीजों को और बदतर बनाने के लिए शहरी विकास विभाग, झारखंड सरकार ने अब और भी निर्दयी कानून पेश किया है, जो प्रस्तावित सीओटीपीए संशोधन विधेयक 2020 से भी अधिक कठोर है। इससे शहर को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि भ्रष्टाचार के कारण गरीब दुकानदारों का और ज्यादा उत्पीड़न होगा।

उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील सिटी रिटेलर्स एसोसिएशन का मानना है कि निहित स्वार्थों वाले तंबाकू विरोधी गैर सरकारी संगठनों के दबाव में लाया गया प्रस्तावित लाइसेंसिंग कानून केवल छोटे दुकानदारों की आजीविका को खत्म कर तंबाकू के खुदरा व्यापार को विदेशी कंपनियों/सुपर मार्केट/मॉल के हाथ में पहुंचाने में मदद करेगा।

हमारा मानना है कि कानून में तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों के लिए अनिवार्य लाइसेंस जैसे अव्यावहारिक प्रावधान दिखाते हैं। तंबाकू नियंत्रण कानून बनाने में जुटे अधिकारी सच से कितने दूर हैं। इस तरह के अव्यावहारिक कानून तंबाकू उत्पादों की बिक्री कर जीवन यापन कर रहे शहर के लाखों गरीब लोगों की आजीविका को बर्बाद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में पहले से ही दुनियां का सबसे सख्त तंबाकू-रोधी कानून है, जिसमें पैकेट पर 85 प्रतिशत ग्राफिक स्वास्थ्य चेतावनी, नाबालिगों को बिक्री नहीं करना, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 100 गज की दूरी तक बिक्री नहीं करना आदि जैसे प्रावधान शामिल हैं।

एसोसिएशन का मानना है कि तंबाकू नियंत्रण/व्यापार के लिए वर्तमान सीओटीपीए 2003 विनियमन के तहत ये कानून पर्याप्त हैं। इसलिए तंबाकू उत्पादों के व्यापार पर कोई नया लाइसेंसिंग नियम लागू करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

एसोसिएशन (Association) एक बार फिर चास नगर निगम के मेयर और निगम आयुक्त से अनुरोध करता है कि कृपया झारखंड सरकार के शहरी विकास विभाग द्वारा 1 दिसंबर को जारी तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग आदेश को लागू न करे। इसके बजाय हमारे सदस्यों को कोरोना महामारी के कारण हुए नुकसान से उबरने में मदद करें।

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