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नगरपालिका की लापरवाही के कारण सितू की डेंगू से मौत

 नगरपालिका क्षेत्र में जोड़ाबढ़ा डेंगू का प्रकोप

प्रहरी संवाददाता/बड़बिल(उड़ीसा)। उड़ीसा प्रांत के क्योंझर जिला के हद में जोड़ा नगरपालिका क्षेत्र में इनदिनों डेंगू का प्रकोप बढ़ गया है। खासकर नगरपालिका के वार्ड संख्या 7 में डेंगू बुखार का प्रकोप जारी है। बताया जाता है कि डेंगू से स्थानीय रहिवासी सीतू क्वीन सेठी नाम की 22 वर्षीय युवती की मौत हो गई। जबकि कई मरीजों का डेंगू जैसे जानलेवा बुखार का इलाज चल रहा है।

खबर के मुताबिक उक्त वार्ड में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था के कारण डेंगू का मच्छर अपनी प्रजाति फैलाने में कामयाब हो गया है। जोड़ा नगरपालिका के विभिन्न वार्डों में देखा जा रहा है कि समय पर नालियों की सफाई नहीं होती है। कूड़ा-कचरा का उठाव व सफाई भी ठीक से नहीं हो रही है। वार्डवासियों की शिकायत है कि बार-बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी नगरपालिका इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।

ज्ञात हो कि प्रख्यात सुखनाथ श्रीकृष्ण सेठी और उनकी पत्नी रूपश्री सेठी की दो बेटियों में सबसे छोटी बेटी सीतू को चार दिन पहले बुखार आया। जब उसे जोड़ा स्थित टाटा स्टिल अस्पताल ले जाया गया, वहां डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि उसे डेंगू बुखार है। वहां सितू की तबीयत बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए क्योंझर जिला सामान्य अस्पताल भेजा गया। वहां भी उसके स्वास्थ्य में कोई बदलाव नहीं होने पर उसे कटक में बड़े मेडिकल सेंटर भेज दिया गया।

दुर्भाग्यवश कटक ले जाते समय रास्ते में ही सितू की मृत्यु हो गई। रहिवासियों के अनुसार सितू के पिता श्रीकृष्ण को मरे लगभग 18 साल हो गए हैं। पति की मौत के बाद मां रूपश्री अपनी दोनों बेटियों का मुंह देखते हुए जिंदगी गुजार रही थी। जिसमें अब एक लड़की की जिंदगी समय से पहले खत्म हो गई है।

बताया जाता है कि रूपश्री एक ऑर्गेनिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अल्प वेतन से बच्चों को पढ़ाकर शिक्षित करने का प्रयास किया। उम्मीद यह थी कि अगर लड़की को नौकरी मिल जाएगी तो उसे बुढ़ापे में मदद मिलेगी। उनकी यह आशा सितू की मौत के बाद धरी की धरी रह गयी।

बताया जाता है कि डेंगू के प्रकोप से नगरपालिका क्षेत्र की स्थिति बदतर होने के बाद दो-तीन दिनों तक शहर के विभिन्न हिस्सों में मच्छर के धुएं के साथ मच्छर तेल का छिड़काव किया गया। बाद में यह बिल्कुल बंद सा हो गया। ऐसा प्रतीत होता है कि अब भी उक्त वार्ड के कई मरीजों का इलाज कटक एवं भुवनेश्वर के अस्पतालों में चल रहा है।

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