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शार्क एवं स्वर संस्था द्वारा मनाई गयी सावित्रीबाई फुले की जन्म जयंती

प्रहरी संवाददाता/बगोदर (गिरिडीह)। गिरिडीह जिला के पड़ोसी जिला हजारीबाग स्थित शार्क एवं स्वर संस्था के संयुक्त तत्वाधान में बीते 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले की जन्म जयंती मनाई गई।

इस अवसर पर शार्क कार्यालय सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित करने के पश्चात प्रारंभ किया गया। संगोष्ठी में शार्क संस्था के सचिव बिन्नी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को पुणे के भिड़े बाड़ में हुआ था।

वर्ष 1848 में उन्होंने पहली महिला विद्यालय की स्थापना की एवं 1852 में पहले दलितों की शिक्षा के लिए विद्यालय की स्थापना की। इस तरह से उन्होंने कई विद्यालयों की स्थापना की। साथ में समाज में व्याप्त बुराइयों, कुरीतियों को दूर करने के लिए लगातार संघर्ष करती रही।

शार्क संस्था के मुख्य कार्यपालक डॉक्टर विश्वनाथ आजाद ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल महिला ही नहीं, वह एक प्रेरणा स्वरूप भारत की प्रथम महिला शिक्षिका रही है, जिन्हें महिलाओं को शिक्षित करने के लिए काफी बेईज्जती, यातनाओं का सामना करना पड़ा।

कहा कि जब सावित्री बाई फूले घर से स्कूल जाती थी तो उच्च वर्ग के बच्चों द्वारा कीचड़ फेंकवाना, थूक फेंकना, मल मूत्र फेंकवाने का काम किया जाता था। इतनी सारी यातनाओं के बावजूद सावित्रीबाई फुले कभी पीछे नहीं हटी। डटकर खड़ी रही और समाज को चुनौती देते हुए, हर एक महिला के लिए शिक्षा का द्वार खोल दी। एकल नारी शक्ति संगठन की सुहागिनी टुडू ने कहा कि आज हम जैसे महिलाओं के लिए सावित्रीबाई फुले प्रेरणादाई महिला है।

उन्होंने हमें शिक्षित होने और आगे बढ़ाने के लिए हिम्मत बढ़ाने का काम की है। सावित्रीबाई फुले की जीवनी के बारे में गांव के हर एक महिला को बताने की जरूरत है।
संगोष्ठी का संचालन प्रति गुड़िया ने की। जिसमें मुख्य रूप से मोहम्मद रिजवान, परवाना खातून, मनीषा श्वेता मरांडी, सुहागिनी टुडू, सुषमा मांगलिक, प्रीति गुड़िया, बिन्नी, डॉक्टर विश्वनाथ आजाद, कुमार दिलीप आदि शामिल हुए।

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