एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में लगभग बीस वर्ष पूर्व एक अंकुरित बीज आज विकराल रूप लेता जा रहा है। अब उक्त बिजकण बोकारो जिला के हद को पार कर हजारीबाग जिला के हद में सुदूरवर्ती जंगलो से घिरे गांव में शिक्षा का अलख जगा रहा है। इसका लाभ भी उन इलाकों के बच्चों को मिलने लगा है। उक्त संस्था का नाम है सत्यलोक।
समाजसेवी संस्था सत्यलोक बोकारो तथा हजारीबाग जिले के कई क्षेत्रों जैसे बोकारो जिला के हद में कथारा, पिपराडीह, गांधी ग्राम स्वांग के अलावा हजारीबाग जिला के हद में विष्णुगढ़ प्रखंड के सुदूरवर्ती जंगलो से पुरी तरह घिरा नवाडीह आदि में पिछले दो वर्षों से समाज के पिछड़े तबकों की शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए तथा पिछले बीस वर्षों से पर्यावरण तथा समाज को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रही है।
सत्यलोक वृक्षारोपण और सफाई के साथ-साथ गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का कार्य भी कर रही है। सत्यलोक के संस्थापक एस. एन. राय के अनुसार ‘सत्यलोक – एक नई आशा’ शिक्षा देने के साथ-साथ इन बच्चों को ठंड में गर्म कपड़े देने तथा कंबल बांटने का कार्य भी करती रहती है।
इस संस्था में जहां एक ओर रौशन जो सोफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी ‘बुगंडईटेक’ के मालिक हैं ने पिछले वर्ष अपना जन्मदिन पुणे से आकर यहां के गरीब बच्चों के बीच मनाया था तथा कई सदस्य अपना जन्मदिन उन्हीं बच्चों के बीच मनाते हैं।
जिन्हें ये संस्था मुफ्त शिक्षा देने का कार्य कर रही है। इसी तरह इस वर्ष अभी दुर्गा पूजा के मौके पर 2 अक्टूबर को तरुण राय जो मध्यप्रदेश के सिंगरौली में रहते हैं और सोशल मीडिया द्वारा सत्यलोक के कार्यों से प्रभावित थे। उन्होंने यहां बच्चों के साथ आकर अपना समय बिताया।
उनके बीच कॉपी, पेंसिल, इरेजर, शार्पनर तथा टॉफियां बांटी। सिंगरौली से उनके साथ आए उनके मामा योगी गोविंद निरंजन जो जाने-माने योगगुरु हैं ने अपने अनमोल वचनों द्वारा बच्चों को बेहतर जीवन जीने के सुत्र बताए तथा अपना आशीर्वाद दिया।
तरूण राय के साथ आईं उनकी मां स्वर्ण लता राय ने बच्चों को आश्वासन दिया कि जो भी बच्चे मन लगाकर पढ़ेंगे तथा पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे उनमें से दो की उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी वो वहन करेंगी। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि भविष्य में जब भी जरूरत पड़ेगी वो उनके साथ हैं।
इस मौके पर उपरोक्त के अलावा नवाडीह में सत्यलोक के शिक्षा अभियान के मुख्य किरदार गणेश कुमार रवि सपरिवार उपस्थित थे। इसके अलावा संस्था के सक्रिय सदस्य रोहन, मृणाल सेन, नव्य तथा भीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
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