ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में बेरमो अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में 4 अप्रैल को सरहुल पर्व का समारोह का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार तेनुघाट पंचायत सचिवालय के समीप अनुमंडल स्तरीय बाहा बोंगा सरना समिति के बैनर तले धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया गया। पारंपरिक वेश भूसा के साथ युवक, युवती एवं महिला, पुरुष ढोल, नगाड़े और मांदर के थाप पर थिरकते नजर आए। युवतियों और महिलाओं द्वारा लोक नृत्य किया गया।
यहां नायके बाबा मुकाम मांझी तथा नायके हाड़ाम चमन गंझु टुडू द्वारा विधिवत प्राकृतिक फूलो से पूजा अर्चना किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिप उपाध्यक्ष सह झामुमो नेता राधानाथ सोरेन उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सोरेन ने कहा कि बाहा बोंगा पोरोब आदिवासियों का मुख्य पर्व है। इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जहां शुद्ध रूप से प्राकृतिक सामाग्रियों से पूजा किया जाता।
इस पर अनुमंडल के सभी पंचायतों के आदिवासी समाज के महिला पुरुष एवं बच्चे उपस्थित हुए है। उन्होंने कहा कि इस मंच द्वारा कहना है कि झारखंड सरकार से मांग करते है कि आदिवासियों का बहुल संख्या को देखते हुये राज्य में सरना धर्म कोड लागु किया जाय और राज्य भाषा के दर्जा दिया जाय। कहा कि विगत कई वर्षों से सरना धर्म कोड लागु करने को लेकर लगातार आंदोलन जारी है, पर अभी तक सरना धर्म कोड लागू नही हो पाया।
जानकारी देते हुये उन्होंने बताया कि आगामी 13 अप्रैल को जारंगडीह में बाहा बोंगा पर्व मनाया जायेगा। उस कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं उनकी धर्म पत्नी कल्पना सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।
आयोजन में झामुमो बोकारो जिला व्यवसाय संघ के अध्यक्ष राकेश सेठी भी मांदर की थाप पर थिरकते नजर आए। उन्होंने कहा कि इस अनुमंडल स्तरीय बाहा बोंगा पर्व में झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता सह उत्पाद मद निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद को आना था, परन्तु किसी कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। उनके जगह पर प्रतिनिधि के रूप में उन्हें आने मौका मिला। सेठी ने कहा कि सरहुल प्राकृति का पर्व है।
मौके पर जिप सदस्या माला कुमारी, पूर्व जिप सदस्य दिलीप मुर्मू, मनोहर मुर्मू, करमचन्द हांसदा, फिनिराम सोरेन, सुखनाथ मुर्मू, श्रीराम हेम्ब्रम, सेवालाल मुर्मू, रीता देवी, होपन हेम्ब्रम, कौलेश्वर मुर्मू, सीडी हांसदा, बाबूचंद मुर्मू, मुखिया अरविंद मुर्मू, नेमचंद मांझी, सीताराम मुर्मू, शक्तिधर महतो आदि मौजूद थे।
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