एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कोल इंडिया प्रबंधन द्वारा पुरी व्यवस्था को एक सूत्र में पिरोने तथा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए बीते फरवरी माह से सैप सिस्टम (व्यवस्था) लागू की गयी है। इसे एकसाथ कोल इंडिया (Coal India) की सभी अनुसंगी इकाई में लागू किया गया है। यह व्यवस्था अब कोयला कामगारों के लिए सिरदर्द बन गया है।
जानकारी के अनुसार कोल इंडिया प्रबंधन माह फरवरी 2022 में पुरे कोयला कंपनी यथा कोल इंडिया की अनुसंगी इकाई सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल, एनसीएल, एमसीएल, डब्ल्यूसीएल में सैप सिस्टम को एकसाथ लागू कर दिया गया। जिसमें प्रत्येक कार्यों के लिए पुरी कंपनी में अलग-अलग सैप कोड स्थापित किया गया।
समस्या यहीं से प्रारंभ हो गया। जब कामगारों का वेतन विसंगति दूर होने के बजाय यह परेशानी का सबब बन गया। खासकर कोल इंडिया की अनुसंगी इकाई सीसीएल (CCL) के कामगारों के साथ यह देखने को आ रहा है।
इस संबंध में इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के सीसीएल सचिव अजय कुमार सिंह ने 28 अगस्त को एक भेंट में कहा कि सैफ सिस्टम के कारण कोयला मजदूरों का मासिक वेतन से एलआइसी की प्रीमियम राशि, कॉऑपरेटिव आदि की कटौती नहीं हो पा रहा है, जिससे मजदूर इन लाभकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में इस सैप सिस्टम का औचित्य उनके समझ से बाहर है।
राकोमयू सीसीएल संगठन सचिव बेदव्यास चौबे ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन को चाहिए कि सैप सिस्टम में त्वरित सुधार का विकल्प दे, ताकि मजदूरों की किसी प्रकार की विसंगति को दूर किया जा सके। राकोमयू कथारा क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष धनेश्वर यादव ने सीसीएल के सीएमडी से इस मामले में पहल कर त्वरित समाधान की मांग की है।
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