रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 28 दिसंबर को बोकारो के सेक्टर बारह स्थित सरना स्थल में संथाली भाषा जीतकर दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व देवेश टुडू जबकि मंच संचालन लीलू सोरेन ने किया।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2025 ओलचिकी लिपि के सौ वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जो गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की दूरदर्शी देन है। कहा कि इस लिपि ने संथाली भाषा को सशक्त पहचान दी और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया।
देवेश टुडू ने ओलचिकी लिपि के संरक्षण और व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। सरना समिति के सचिव बीआर सामंता ने जनजातीय भाषाओं के संवर्धन की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में ओलचिकी और संथाली भाषा को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर साहलाय मांझी, लक्ष्मण सोरेन, शंकर टुडू सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
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