बंदरों को भूख से बचाने के लिए ठाणे निवासियों का अनूठा प्रयोग
कार्यालय संवाददाता/मुंबई। वनों का विनाश के साथ -साथ खतरे में पड़े वन्यजीवों को सहारा देने और मानव बस्तियों में बंदरों के आतंक बचाने के लिए ठाणे शहर के नागरिकों ने अनूठा प्रयोग किया है। पर्यावरण दिवस के अवसर पर पाचपखाड़ी ठाणे म्हाडा गृह निर्माण सहकारी महासंघ की पहल पर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के मामा भांजा क्षेत्र में 250 से अधिक फलदार वृक्ष लगाए गए। इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य जंगल में फलदार वृक्ष उपलब्ध कराना है, ताकि जंगली जानवरों, खासकर बंदरों को भोजन के लिए मानव बस्तियों की ओर पलायन न करना पड़े महासंघ के सदस्यों ने बताया। एक सदस्य ने कहा अगर बंदरों को प्राकृतिक भोजन मिले, तो उनके और मनुष्यों के बीच संघर्ष को भी टाला जा सकता है।
गौरतलब है कि इस पहल के लिए गर्मियों में विभिन्न प्रकार के फलों के बीज एकत्र किए गए। उन बीजों को मानसून के दौरान उचित स्थानों पर लगाया गया। इन पेड़ों में जामुन, सीताफल, आंवला, चिंच, अमरूद जैसे स्थानीय और जानवरों को आकर्षित करने वाले फलदार पेड़ शामिल हैं। इसके साथ ही वट, पीपल और नींबू जैसे पर्यावरण के अनुकूल और ऑक्सीजन युक्त पेड़ भी लगाए गए। पर्यावरण दिवस के अवसर पर महासंघ ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया।
पाचपाखड़ी में 25 इमारतों से एकत्र 120 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को प्लास्टिक विरोधी ब्रिगेड के सहयोग से एकत्र किया गया और उसका उचित तरीके से रीसायकल किया गया। इस अभियान ने न केवल कचरे की समस्या को हल किया बल्कि नागरिकों में पर्यावरण जागरूकता को भी मजबूत किया। यह पहल इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह किसी संगठन की परियोजना नहीं है, बल्कि आम नागरिकों द्वारा की गई एक स्वतःस्फूर्त पहल है। पर्यावरणविदों ने विश्वास व्यक्त किया है कि यदि भविष्य में भी ऐसी पहलों को लगातार लागू किया जाता है, तो शहरी और ग्रामीण जैव विविधता के बीच संतुलन हासिल किया जा सकता है।
Tegs: #Sanjay-gandhi-national-park-mama-bhanja-mountains-fruitful-tree-initiative
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