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दशम बोर्ड में उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोदारी का रिजल्ट सराहनीय

स्कूल टॉपर बिरेन्द्र कुम्हार ने प्राप्त किया 66.2 प्रतिशत अंक

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड एकेडमी कौंसिल (जैक बोर्ड) के तहत आयोजित कक्षा दशम बोर्ड परीक्षा में पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में मनोहरपुर प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोदारी का रिजल्ट सराहनीय रहा। छात्रों के बेहतर प्रदर्शन से विद्यालय प्रबंधन में हर्ष है।

बताया जाता है कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोदारी के 43 छात्र-छात्राओं ने दशम बोर्ड परीक्षा दी थी, जिसमें प्रथम श्रेणी से 3, द्वितीय श्रेणी से 19 और तृतीय श्रेणी से 14 छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए। जिसमे स्कूल टॉपर प्रथम बिरेन्द्र कुम्हार 66.2 प्रतिशत अंक, द्वितीय हेमन्ती चंपिया 65.6 प्रतिशत तथा तृतीय शुभम सिद्धू ने 61.6 प्रतिशत प्राप्त किया है।
विद्यालय के प्रधान शिक्षक सह प्रधानाध्यापक उत्तम कुमार दास ने संतोषजनक रिजल्ट पर हर्ष जताया एवं इसका श्रेय छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को दिया।

उन्होंने सभी सफल छात्र छात्राओं को शुभकामना देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए बताया कि नियमित अध्ययन और कठोर परिश्रम सफलता का मूल मंत्र हैं। प्रधानाध्यापक दास ने बताया कि सारंडा के घने वन क्षेत्र स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोदारी मे सिर्फ चार कमरे है। बावजूद इसके वर्ग प्रथम से वर्ग दशम तक लगभग 300 बच्चे यहाँ पूरे मेहनत से अध्ययन करते है। स्कूल में एक भी हाई स्कूल स्तर के शिक्षक नहीं है।

अंशकालिक स्थानीय शिक्षकों अजय तांती, नीतीश कुमार, निशा दास का परीक्षा परिणाम में अहम योगदान रहा है। कहा कि यहां प्राथमिक शिक्षक सिर्फ एक है तथा 3 पारा शिक्षक से अध्यापन का कार्य लिया जा रहा है। अभावग्रस्त बच्चों के उत्कृष्ट परिणाम इस बात के संकेत हैं कि झारखंड सरकार एवं शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन अगर उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोदारी पर ध्यान दे तो उक्त विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी शिक्षण संस्थान के रूप में पहचान बनाने में कत्तई पीछे नही रहेगा।

उक्त विद्यालय के बढ़ते चरण का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि उक्त विद्यालय वर्ष 1949 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में स्थापित की गई थी। यह वर्ष 2003 में अपग्रेडेड मिडिल स्कूल बनी तथा 2016-2017 में अपग्रेडेड हाई स्कूल के रूप में बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान कर रही है। सबसे दु:खद स्थिति यह है कि तब से लेकर आज तक कोई भी हाई स्कूल शिक्षक झारखंड सरकार द्वारा यहां पदस्थापित नहीं किया गया है।अंशकालिक स्थानीय शिक्षकों का परीक्षा परिणाम में अहम योगदान रहा है।

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