Advertisement

करमपदा, नोवागांव, भनगांव व् वनग्राम रहिवासी खदान प्रबंधन के रवैया से नाखुश-मुखिया

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में करमपदा, नोवागांव, भनगांव एवं वनग्राम के रहिवासी सेल के किरीबुरू खदान प्रबंधन के रवैये से आक्रोषित दिख रहें हैं। उक्त बाते नोवमुण्डी प्रखंड के ग्राम पंचायत मेघाहातुबुरु उत्तरी मुखिया लिपी मुण्डा ने 28 नवंबर को कही।

उन्होंने कहा कि सेल ने सीएसआर के तहत खनन प्रभावित गांव का समुचित विकास हेतु गाँवो को गोद लिया हैं, लेकिन यह वादा पूरी तरह सफेद हांथी बन गया है। मुखिया ने बताया कि खनन क्षेत्र के सैकड़ो युवक-युवतियां बेरोजगार हैं। खदान में स्थानीय युवाओं को मजदूरी का काम नहीं बल्कि बाहरी कामगारों को ठेका कम्पनी में काम दिया जाता है। सेल किरीबुरु प्रबंधन की बिजली व्यवस्था भी सिर्फ सफेद हाथी होकर रह गई है।

उपरोक्त तीनों गांव के स्कूलों में सौन्दर्यीकरण कार्य सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र के रहिवासियों के खेत, मवेशी/जानवर शुद्ध पानी से वंचित हैं। किरीबुरू खदान का मालवाहक, रेलवे द्वारा परिवाहन करने से क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। जिससे ग्रामीण विभिन्न बीमारीयों का शिकार हो रहे हैं। बताया जाता है कि अनेकों गांव से छोटी वाहन हायर कर ग्रामीण, ग्राम पंचायत मेघाहातुबुरू द्वारा आयोजित सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में शामिल हो सके। जिससे रहिवासियों में खान प्रबंधन के प्रति नाराजगी है।

मुखिया ने कहा कि प्रबंधन को प्रदर्शन कर इसे अवगत कराई जायेगी। कहा कि स्थानीय युवाओं को तृतीय व् चतुर्थ श्रेणी में बहाली नहीं निकाला जाता। सिर्फ अधिकारियों की बहाली हो रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। ज्ञात हो कि प्रभावित गांवों के मुखिया लिपी मुण्डा ने सेल किरीबुरू खदान के मुख्य महाप्रबंधक (खान) को बस सेवा बहाल करने हेतु मांग पत्र दिया था। महाप्रबंधक (एच आर) से वार्त्तालाप पर बस सेवा नहीं देने की बात कही गयी था। लेकिन मंदिर जाने के लिए बस देने का बात कहा। कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *