पांच वर्ष के बाद करगली वाशरी से शुरू होगा रिजेक्ट कोल सेल

सुरक्षा के साथ रिजेक्ट सेल 31 अगस्त से होगी शुरु-पीओ

एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल बीएंडके क्षेत्र के करगली वाशरी से 5 वर्ष के बाद रिजेक्ट सेल प्रारम्भ होगा।

सीसीएल बीएंडके क्षेत्र के करगली वाशरी के अंतर्गत सिंगारबेडा के बालू बैंकर स्थित रिजेक्ट कोल डंप से कोल उठाव को लेकर 30 अगस्त को वाशरी पीओ वी एन पांडेय ने सीआईएसएफ इंस्पेक्टर के साथ निरीक्षण किया।

इस अवसर पर पीओ पांडेय ने कहा कि सुरक्षा के साथ रिजेक्ट कोल 31 अगस्त से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि यहां रिजेक्ट कोल सेल बंद होने से स्थानीय कोल व्यापारियों को काफी परेशानी हुई।

रिजेक्ट सेल से जुड़े मजदूर, कोयला ढोने वाले ट्रकों के मालिक, ड्राइवर, खलासी समेत कोयला के ट्रांसपोर्टिंग पर निर्भर रहने वाले कई व्यापारी वर्ग व उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझता रहा। कइयों ने क्षेत्र से पलायन करने को भी मजबूर हुए। इस बीच लंबी लड़ाई और सीसीएल के अधिकारियों के सहयोग से करगली वाशरी से रिजेक्ट कोल रोड सेल चालू हो सका है।

जानकार सूत्रों के अनुसार 50 हजार टन रिजेक्ट कोल उठाव को लेकर ₹ 2800 प्रति टन बिडिंग हुआ है, जिसका उठाव की अंतिम तिथि अगले माह 17 सितंबर निर्धारित है। ऐसे में किसी भी कीमत में निर्धारित समय में कोयला का उठाव संभव नहीं दिखता है। डीएमओ चालान नहीं मिलने के कारण रोड सेल चालू होने में समय लगा। सूत्र बताते है कि 18 महीना में 11 लाख टन रिजेक्ट कोयले का उठाव सिंगारबेडा के बालू बैंकर स्थित रिजेक्ट कोल डंप से करना है।

बताते चले कि 29 दिसंबर 2017 को हाईवाल धंसने से भेड़मुक्का बस्ती निवासी गुलाब अंसारी के 20 वर्षीय पुत्री नरगिश खातुन की मौत हो गई थी। वहीं बिक्कू मियां की पत्नी फातमा बीबी व शनिचर तुरी की पत्नी एतवारी देवी घायल हो गई। इससे पूर्व 26 अप्रैल 2015 को हाईवाल के चाल धंसने से कमलेश महतो की 35 वर्षीय पत्नी उमा देवी व एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी।

इससे पूर्व दो महिलाओं की मौत हो चूकी है। सीसीएल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए बालू बैंकर में जमे रिजेक्ट कोल का उठाव करना चाहिए। नगर परिषद फुसरो अंतर्गत भेड़मुक्का से लेकर सिंगारबेड़ा तक दामोदर नदी के किनारे रिजेक्ट कोल का भंडारण है।

सीसीएल बीएंडके क्षेत्र के करगली वाशरी से निकलने वाले रिजेक्ट कोल को इसी जगह दामोदर नदी तट पर दशकों पूर्व ढेर किया गया था। जिसके बाद पिछले कई वर्षों से टेंडर के माध्यम से इसकी बिक्री किया जाता रहा है।

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