एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। सरकार अपनी सुविधानुसार पांच बजे के बजाय 7 बजे तक वोटिंग करा सकती है, लेकिन खराब मौसम, सड़क जाम के कारण 4-5 मिनट देर से पहुंचने पर छात्रों को परीक्षा में बैठने नहीं दे सकती है। नियम-कानून तो है ही लेकिन मानवता एवं व्यवहारिकता भी होना चाहिए।
ज्ञात हो कि विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने के लिए दशकों कठिन परिश्रम करते है और थोड़ी देर हो जाने पर पल भर में उसके सपने को ताड़-ताड़ कर देने का किसी भी मजिस्ट्रेट एवं सेंटर सुप्रिटेंडेंट आदि का अधिकार नहीं होना चाहिए। पुलिस -अधिकारी से लेकर कोर्ट-कचहरी तक को जरूरत पड़ने पर नियम-कानून को शिथिल-लचीला करना पड़ता है, फिर किसी भी छात्र को क्षण भर लेट के कारण परीक्षा से वंचित कर देना अन्याय है।

समस्तीपुर जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर 4-5 मिनट लेट पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं को परीक्षा देने से रोकने की खबर आ रही है। परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र पर रोते-बिलखते, पैर पकड़ते देखा जा रहा है। परीक्षा छूटने से उनकी मरनासन्न स्थिति को देखा जा रहा है। लेकिन परीक्षा में बैठने की उन्हें अनुमति नहीं मिली।

यह परीक्षार्थी के जीवन एवं उनके भविष्य से खिलवाड़ है और इसकी जांच कर दोषी मजिस्ट्रेट, सेंटर सुप्रिटेंडेंट आदि पर कारवाई करने, छूटे परीक्षा का पुनर्परीक्षा लेने एवं सेंटर पर पहुंचने के नियम को लचीला बनाने की मांग छात्र संगठन आइसा जिला प्रभारी एवं भाकपा माले समस्तीपुर जिला स्थायी समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बिहार सरकार से की है।
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