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रामराज्य की स्थापना के लिए राम ने प्रत्येक को स्वीकार किया-अनुराधाश्री

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। विवाहोपरांत भगवान राम अयोध्या लौटे तब उनका अद्भुत स्वागत किया गया। अयोध्यावासियों ने श्रीसीताराम का मांगलिक दर्शन कर भावविभोर हो उठे।

श्रीधाम अयोध्या से पधारी देवी अनुराधा सरस्वती ने बीते 18 मार्च की रात बोकारो जिला के हद में जरीडीह प्रखंड के गांगजोरी स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय श्री108 हनुमंत महायज्ञ के दौरान प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने उपदेश दिया है कि जीवन में अधिक सुख आए तो व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए। देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए रामजी 14 वर्षों के लिए अपनी भार्या सीता तथा भ्राता लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान करते हैं।

राजा बनने से पूर्व रामजी ने सोचा कि केवल अयोध्यावासियों को स्वीकार करुं तो रामराज्य स्थापित नहीं होगा। इसलिए अवध से जाना चाहिए। रामजी गये और भीलों को, गिद्ध राज जटायु को गोद में लेकर पक्षियों को, वानर-भालूओं को स्वीकार कर पशुओं को, राक्षस राज विभीषण को स्वीकार कर दुनिया को संदेश दिया कि सबको गले लगाए बगैर रामराज्य की स्थापना नहीं हो सकती। अतः रामराज्य हेतु सबको अपना बनाना सीखें। समाज में दया, करुणा, सौहार्द, समरसता और प्रेम का भाव परोसने का प्रयास किया जाय, तभी रामराज की स्थापना संभव है।

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