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तेनुघाट में अम्बेडकर बुद्धा सोसाइटी द्वारा निकाली गई रैली

प्रहरी संवाददाता/तेनुघाट (बोकारो)। अम्बेडकर बुद्धा सोसाइटी ऑफ इंडिया सहित विभिन्न बहुजन संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में 13 अक्टूबर को रैली निकाली गयी। रैली बोकारो जिला के हद में बोकारो थर्मल से तेनुघाट तक निकालकर दोषी वकील राज किशोर को गिरफ्तार करने की मांग की गयी।

राष्ट्रपति के नाम इस संबंध में एक ज्ञापन बेरमो एसडीओ को सौंपा गया। ज्ञापन में संविधान और सामाजिक न्याय से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर नाराजगी व्यक्त की गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। रैली बोकारो थर्मल से शुरू होकर कथारा, स्वांग, गोमिया, होसिर औऱ साड़म होते बेरमो अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट पहुंची।

यहां वक्ताओं ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की घटना संविधान पर प्रहार है। इसे एक सुनियोजित साजिश बताया गया और ज्ञापन में मांग की गई कि संबंधित मनुवादी वकील पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाय।

वहीं हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरन कुमार की संस्थागत हत्या के लिए राज्य के डीजीपी को जिम्मेदार ठहराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हरिओम बाल्मीकि के साथ हुई जातीय हिंसा के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और मृतक के परिवार को 25 लाख मुआवजा देने की मांग की गई।

ग्वालियर हाईकोर्ट के वकील अनिल मिश्रा और आनंद स्वरूप महाराज द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर के विरुद्ध दिए जा रहे विवादित बयानों की निंदा करते हुए कहा गया कि संविधान निर्माता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपरोक्त के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई।
इसके अलावा ज्ञापन में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई तथा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की गई। साथ ही, केंद्र सरकार पर दलितों के संवैधानिक आरक्षण पर लगातार हमले करने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि इससे दलित समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

ज्ञापन अम्बेडकर-बुद्धा सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष छोटन राम, भारतीय बौद्ध महासभा के कालेश्वर बौद्ध, रविंद्र बौद्ध, धर्मनाथ बौद्ध, मुकेश कुमार, सुरेन्द्र, बालगोविंद मंडल, चंदन गौतम, रामप्रसाद, बाली रजवार, विजय दास, महेंद्र, बाबूचंद, मुकेश राम, गिरधारी, मदन रविदास, शिवनारायण राम सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
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