कोलियरी प्रबंधन से आरपार के मुड में राकोमसं

संडे को होगा जारंगडीह कोलियरी का चक्का जाम-वरुण कुमार सिंह

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की एक बैठक बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के जारंगडीह स्थित यूनियन कार्यालय में 17 फरवरी को आयोजित किया गया।

अध्यक्षता शाखा अध्यक्ष योगेंद्र सोनार तथा संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अशोक ओझा ने किया। बैठक में मुख्य रूप से कांग्रेस के बोकारो जिला उपाध्यक्ष सह राकोमसं कथारा क्षेत्रीय सचिव वरुण कुमार सिंह उपस्थित थे। बैठक में प्रबंधन से आर-पार की लड़ाई लड़ने की बात उपस्थित सभी वक्ताओं द्वारा कहा गया।

इस अवसर पर राकोमसं क्षेत्रीय सचिव वरुण कुमार सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन अपनी कार्यप्रणाली को सुधारे, अन्यथा राकोमसं अकेले दम पर कोलियरी का पूरी तरह चक्का जाम कर सकता है। उन्होंने कहा कि बीते एक फरवरी को उनके नेतृत्व में परियोजना कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन करते हुए प्रबंधन को 21 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था।

इसे लेकर 14 फरवरी को प्रबंधन के साथ संपन्न वार्ता में अधिकांश मांगे पूरा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी। बावजूद इसके दो प्रमुख मांगों जिसमें रविवार ड्यूटी आउटसोर्सिंग कंपनी के कामगारों की तरह देने तथा कोलियरी को विभागीय स्तर पर मशीन देने को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर वार्ता के बाद ही पूरा करने की बात कही गई थी।

इसके लिए प्रबंधन द्वारा दो दिन का समय लिया गया, लेकिन प्रबंधन द्वारा यूनियन को अब तक कोई जानकारी नहीं दिया गया है। इसलिए यूनियन की पीट मीटिंग 18 फरवरी को जारंगडीह खुली खदान में आयोजित किया गया है। जिसमें आगामी 19 फरवरी को परियोजना में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी के चक्का जाम को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 और 1973 में तब के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर खदानों को कोयला मजदूरों के हाथों में सौंप दिया था। वर्तमान में केंद्र सरकार व् कोल इंडिया प्रबंधन की गलत नीतियों के कारण आज 75 प्रतिशत कोयला खदान निजी हाथों को सौंप दिया गया है। जिससे कोयला मजदूरों की हालत 1971 से पूर्व की स्थिति जैसी हो गई है।

उन्होंने कहा कि राकोमसं यहां के मजदूरों के बल पर अकेला इतनी शक्ति रखती है कि पूरा क्षेत्र का चक्का जाम कर सकती है। इसका नमूना कई वर्ष पूर्व कथारा अस्पताल में कार्यरत कामगारों की सुविधा कटौती के सवाल पर केवल जारंगडीह के राकोमसं समर्थित मजदूरों द्वारा जीएम कार्यालय पर किए गए जोरदार प्रदर्शन के बाद अस्पताल के कामगारों को सुविधा बहाल करने की जीत के साथ हुई थी।

उन्होंने यहां कार्यरत मजदूरों को आउटसोर्सिंग कंपनी की तरह संडे ड्यूटी देने और कोलियरी में विभागीय मशीन की आपूर्ति करने तक आंदोलन की चेतावनी दी। साथ ही कहा कि संडे को तमाम मजदूर अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए आउटसोर्सिंग पैंच को बंद करने का काम करेंगे।

मजदूर नेता सिंह ने कहा कि केवल आंदोलन कोई मुद्दा नहीं है। मजदूरों का हक अधिकार मिलना जरूरी है। राकोमसं हार मानने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी हक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ना चाहिए, क्योंकि लड़ाई में कभी हार नहीं होता है। या तो जीत होता है या फिर सीख मिलता है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यहां के तमाम मजदूरों की है। हम सभी को मिलकर लड़ना है।

मौके पर उपस्थित राकोमसं क्षेत्रीय उपाध्यक्ष वकील अंसारी, रामेश्वर यादव, सहायक सचिव अंजनी सिंह, शाखा अध्यक्ष योगेंद्र सोनार, राजेश कुमार सिन्हा आदि ने संबोधित करते हुए जोरदार आंदोलन की वकालत की।

इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा किशुन मंडल, ब्रजेश सिंह, नंदकिशोर प्रसाद, अनिल कुमार शर्मा, रमेश राम, कृष्णा हाड़ी, नागेश्वर महतो, सूरज कुमार, रामजी साव, जय नारायण, डुलू सिंह, प्रेमचंद सिंह, शिवलाल प्रसाद, बैजनाथ मंडल, उमाशंकर तिवारी, बबन भुइयां, बृजेश कुमार, कन्हाई राम, हरिहर मंडल, पुनीत मंडल, श्याम बहादुर सिंह, अनिल कुमार सिंह, राजेंद्र मिस्त्री, शंकर शर्मा, आदि।

अमृत करमाली, गोविंद साव, नागेश्वर बाउरी, संदीप कुमार यादव, संजय कुमार, परमानंद राम, गुरुदत्त सिंह, सुशील सिन्हा, कजरु हाड़ी, ईश्वर मंडल, लालू श्याम, संजय सागर, अशोक घांसी, सुजीत कुमार सिंह, भोलू चंद भगत, बी के सिंह सहित सैकड़ों समर्थक उपस्थित थे।

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