रामकथा और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर राजनजी महाराज का दृष्टिकोण

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला मुख्यालय सेक्टर चार के मजदूर मैदान में आयोजित राजनजी महाराज द्वारा रामकथा में श्रद्धालुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

बीते 27 मार्च से आगामी 4 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन 15 से 20 हजार श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। महाराजजी राम कथा के माध्यम से जीवन की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी क्रम में 2 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस वार्ता में उनसे विद्यार्थियों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर सवाल पूछा गया।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक पारिवारिक और शैक्षिक दबाव आत्महत्या का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों से अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करवाना चाहते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को अपने तरीके से जीवन को समझने और चुनौतियों का सामना करने का अवसर देना चाहिए। कई महान व्यक्तित्व ऐसे भी रहे हैं, जिनका औपचारिक शिक्षा स्तर ऊंचा नहीं था, फिर भी उन्होंने समाज में अद्वितीय योगदान दिया है।

महाराजजी का संदेश स्पष्ट था कि बच्चों को मानसिक दबाव से मुक्त करें। उन्हें प्रेम और मार्गदर्शन दें, ताकि वे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम से बच सकें। कहा कि परिवार और समाज का सहयोग उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

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