राजयोग मन के संकल्पों को एकाग्र कर विकारों से मुक्त होना सिखाता है-बीके अंजली

ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। ब्रह्मा कुमारी गिरिडीह केन्द्र द्वारा शहर के अलकापुरी में सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन पाठशाला की शुरुआत की गई है।

ब्रह्मा कुमारी केन्द्र की मुख्य संचालिका बीके अंजली दीदी ने 21 फरवरी को अलकापुरी में प्रारम्भ राजयोग मेडिटेशन पाठशाला में कहा कि राजयोग एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिसके द्वारा जीवन में सच्ची सुख, शांति प्राप्त हो सकती है।

उन्होंने कहा कि आज की भौतिकवादी दुनिया में साधन जुटाने को जन साधारण असाधारण श्रम कर रहे हैं। जिससे हर व्यक्ति तनावग्रस्त होकर अपने जीवन में परेशान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे छुटकारा पाने के लिए योग साधना ही एक ऐसी औषधि है, जो मनुष्य को आत्म शांति दे सकती है।

उन्होने कहा कि आत्मा से परमात्मा के मिलन की विधि का नाम ही राजयोग है। राजयोग से मन की दु:ख और अशांति जैसे बीमारियों का सही उपचार होता है। उन्होंने कहा कि मन की गति काफी तीव्र होती है। साथ ही समय कभी भी मन के लिए रुकावट नहीं बनता है।

कोई विचार पहले मन में आता है, फिर बुद्धि में, उसके बाद जब कोई विचार रूपी कार्य किया जाता है तो वह संस्कार बन जाता है। बीके अंजली ने कहा कि राजयोग में मन की शक्ति का उपयोग किया जाता है। राजयोग से मन के संकल्पों को एकाग्र कर विकारों से मुक्त हो सकते हैं।

कहा कि राजयोग से मन को परमात्मा के सानिध्य् में ले जाना एवं आत्म स्वरूप में स्थित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्मा की जो वास्तविकता है, उस वास्तविकता में अपने मन की एकाग्रता को स्थापित करना ही आत्म स्वरूप का भाव है। राजयोग हर मनुष्य के जीवन को सुखमय बना सकता है।

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