वृद्धा ने लगाई गुहार, मुझे इस नर्क से निकालो!
मुश्ताक खान /मुंबई। जंगल राज की तर्ज पर चल रहे मनपा एल विभाग के वार्ड क्रमांक 169 में स्थित रेलवे कॉलोनी, क्रांति नगर, साबलेनगर और संतोषीनगर की जनता बरसाती बीमारियों के खतरे से दहशत में है। यहां की जनता का कहना है की मुंबई सहित देश के अन्य हिस्सों में लोग कोरोना जैसी महामारी से काल के गाल में समा रहे हैं। लेकिन यहां बरसाती बीमारियों से खतरा बढ़ता जा रहा है।
इस वार्ड में जल जमाव व गंदगी के कारण बरसाती किटाणुओं की भरमार हो गई है। इसके बाद भी हमारी नगरसेविका का कोई पता है। उपरोक्त नगरों के दर्जनों नागरीकों का कहना है की चुनाव के बाद हम लोगों ने यहां की नगरसेविका को देखा ही नहीं है।
नगरसेविका को नहीं पहचानते मतदाता
मिली जानकारी के अनुसार मामूली बारिश में भी एल विभाग के वार्ड क्रमांक 169 में स्थित रेलवे कॉलोनी, क्रांति नगर, साबलेनगर और संतोषीनगर पूरी तरह डूब जाता है। इस इलाके में बढ़ती गंदगी और जल जमाव के कारण जनता को कहीं भी आने जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है।
बता दें की हल्की बारिश में भी इन नगरों के नागरिकों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। यहां यह अनुमान लगाना मुश्किल है की ”गड्ढ़े में पानी है या पानी में गड्ढ़ा” इसी पशोपेश में लोग परेशान हैं। जबकि रेलवे कॉलोनी से महज 100 मीटर की दूरी पर मनपा का बड़ा नाला भी है। इसके बावजूद जल निकासी का कोई रास्ता नहीं है। इसलिए रेलवे कॉलोनी के पास एक पानी खींचने वाला पंप लगाया गया है जो की नाकाफी है।
ऐसी सूरत में इन नगरों के नागरिकों को हॉस्पिटल, बाजार, स्टेशन या किसी जरूरी काम से कहीं जाना हो तो कैसे जाएं? बताया जाता है की यहां की नगरसेविका प्रवीणा मनीष मोरजकर हैं, जो विकास का ढिंढोरा तो पीटती हैं। लेकिन धरातल पर कुछ भी दिखाई नहीं देता, जैसे की वो खुद भी इस क्षेत्र में नजर नहीं आतीं।
इस मुद्दे पर यहां के स्थानीय रहिवासियों कि प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो दर्जनों लोग जमा हो गए, इससे कई नई बातें सामने आई हैं।
इनमें रेलवे कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की करीब डेढ़ दशक से रेलवे कॉलोनी, क्रांतिनगर, साबलेनगर और संतोषीनगर की जनता अपनी समस्याओं को शासन और प्रशासन के सामने रखती आ रही है। लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा की मनपा एल विभाग का वार्ड क्रमांक 169 राम भरोसे चल रहा है। इस क्षेत्र में मनपा और मध्य रेलवे दोनों का अधिकार है।
इसके बावजूद जनता की समस्याओं का कोई हल नहीं निकला। इन दोनों की चक्की में यहां की जनता पिस्ती जा रही है। उन्होंने कहा की इन्हीं कारणों से अब नेताओं के सुर बदलने लगे हैं। जबकि चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार में आने वाला हर नेता यही राग अलाप्ता है की चुनाव जीने के बाद सबसे पहले इन नगरों का विकास होगा। लेकिन यहां से जीतने वाला कोई भी नेता अपने वादों पर खरा नहीं उतरा।
गृहणी शोभा नाइडू ने कहा की पिछले दस पंद्रह वर्षों से हम लोगों ने अनगिनत शिकायतें की है लेकिन उन शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि देश के आधुनिक शहरों में मुंबई का नाम आता है और मनपा का बजट कई देशों की व्यवस्था से अधिक होती है।
बावजूद इसके यहां की जनता नारकीय जीवन जाने को मजबूर है। श्रीमती नाइडू ने कहा की यहां गर्मी, सर्दी और बरसात हर मौसम में इस क्षेत्र की जनता को जद्दोजेहद करना पड़ता है। उन्होंने कहा की हमने यहां की नगरसेविका को चुनाव के बाद से अब तक नहीं देखा, क्योंकि वो इस इलाके में आती ही नहीं हैं। तो विकास की बातें करने का कोई तुक ही नहीं है।
स्थानीय समाजसेवक एवं पेंट्री संचालक मंटू गुप्ता ने बताया की मैंने किसी भी नगरसेवक या नगरसेविका द्वारा इस परिसर में कोई विकास कार्य करते नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इस परिसर में मानसून के दौरान जल जमाव आम बात हो गई है। इसी तरह गंदगी का भी अंबार लगा रहता है। इन संकटों से उबरने के लिए हम लोग किससे फरियाद करें।
चूंकि अब तक की शिकायतों का कोई नतीजा नहीं निकला। गुप्ता ने कहा की यहां से चुनाव जीतने वाली शिवसेना की नगरसेविका के बारे में सुना है लेकिन अब तक देखा नहीं, जबकि दूसरे वार्डों के नगरसेवक हों या नगरसेविका सभी अपनी वार्ड की जनता से रूबरू होते हैं।
गृहणी लक्ष्मी जोगी, इन्होंने राज्य सरकार से गुहार लगाई है की मुझे इस नर्क से निकालो, वरना गंदगी की वजह से हमारा दम घुट जाएगा। उन्होंने कहा की एक तरफ मानसून की मार तो दूसरी तरफ स्थानीय नगरसेविका की बेरुखी ने हम लोगों को हिलाकर रख दिया है।
अब हमारे सब्र का बांध टूटने लगा है ऐसे में समय रहते यहां की समस्याओं का समाधान नहीं होना दुखद होगा। उन्होंने मुंख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से आग्रह किया है की मामूली बारिश में भी वे खुद इस परिसर में आकर हकीकत को देखें।
उपरोक्त मुद्दे पर नगरसेविका प्रवीणा मोरजकर से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके पति मनीष मोरजकर ने फोन उठाया, प्रश्नों को सुनने के बाद उन्होंने कहा की मैं फोन करता हूँ। इसके एक सप्ताह बाद कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई।लेकिन हर बार वो मेसेज देते हैं की मैं कॉल करता हूँ। इन्हीं कारणों से उनकी प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकी।
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