एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची में जलनिकासी के नाम पर पिछले दस वर्षो मे 887 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद राजधानी की जनता त्रस्त है। जनता को राहत नहीं मिली। जरूरत है कि जनता इसका हिसाब मांगे और विकास के नाम पर लूटने वाले नेताओ को सबक सिखाए।
उपरोक्त बातें 20 जून को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही।
उन्होंने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 10 वर्षों में जलजमाव की समस्या को खत्म करने के लिए 887 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है, फिर भी शहरवासियों को इस समस्या से निजात नहीं मिली। यह गंभीर मुद्दा है और जांच का विषय भी है। नायक ने कहा कि भाजपा, झामुमो और कांग्रेसी नेताओं ने जलजमाव समाधान के नाम पर खुलेआम लूट को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि इन सत्ता के मठाधीशो ने जनता को नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया और जनता की सुविधाओं के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया है।
नायक ने रांची में जलजमाव की समस्या पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शहरवासियों को हर बारिश में जल भराव, यातायात जाम और गंदगी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने विभिन्न योजनाओं का हवाला देते हुए बताया कि सरकारों ने बड़े-बड़े दावे किए, मगर धरातल पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमृत योजना (वर्ष 2015 से 2019) राज्य में रघुबर दास सरकार के कार्यकाल में शहरी जलापूर्ति और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करने के लिए शुरू की गई इस योजना के तहत रांची में 290 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की गईं। कहा कि 22 फरवरी 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास और शहरी विकास मंत्री सी.पी. सिंह ने उक्त कार्य का शिलान्यास किया था। इसमें सीवरेज सिस्टम और ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने का दावा किया गया, लेकिन जलजमाव की समस्या जस की तस रही।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन (वर्ष 2016-2019) रांची को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 656 एकड़ भूमि पर 513 करोड़ रुपये की लागत से परियोजनाएं शुरू की गयी। इसमें ड्रेनेज सिस्टम, सड़क निर्माण और सौंदर्यीकरण शामिल था। फिर भी, एचईसी क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में जल जमाव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
सौंदर्यीकरण और सुदृढ़ीकरण परियोजना (2021) में हेमंत सोरेन सरकार में शहरी विकास मंत्री बन्ना गुप्ता के नेतृत्व में 84 करोड़ रुपये की लागत से नालों का निर्माण और साफ-सफाई पर जोर दिया गया। बताया कि 23 जुलाई 2021 को इन परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ, लेकिन नतीजा वही रहा। जल जीवन मिशन (वर्ष 2019-2025) योजना के तहत रांची के शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में जलापूर्ति और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया गया।
हालांकि, इसका प्रभाव भी नगण्य रहा। कहा कि नेताओं ने जनता को ठगा। तल्ख लहजे में उन्होंने कहा कि, भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के नेताओं ने केवल जनता के टैक्स के पैसों को लूटने का काम किया है। जलजमाव जैसी मूलभूत समस्या का समाधान करने में सभी सरकारें नाकाम रही है। इन नेताओं को जलजमाव के पानी में डूबकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इन योजनाओं में हुए खर्च की उच्चस्तरीय मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से हो और दोषियों को सजा दी जाए।
नायक ने कहा कि रांची के नागरिक सड़कों पर जलभराव, गंदगी और बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि नेताओं ने केवल कागजी योजनाएं बनाकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि रांचीवासियों को स्वच्छ और जलजमाव मुक्त शहर का अधिकार है। इसके लिए जिम्मेदार को अब जवाबदेह बनाना होगा।
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