सत्ताधारी दल ने अपने प्रभाव का किया गलत इस्तेमाल, विरोध में आंदोलन की चेतावनी
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के निकटवर्ती वैशाली जिले में नई किसान सलाहकार समिति के मनोनयन के साथ ही उसका विरोध शुरू हो गया है। नई कमेटी के गठन में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए निवर्तमान आत्मा अध्यक्षों ने विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है।
निवर्तमान आत्मा अध्यक्षों का आरोप है कि मनोनीत नई किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष व सदस्यों के मनोनयन में सत्ताधारी दल द्वारा नियमों की अनदेखी की गई है। वैशाली जिला के हद में लालगंज प्रखंड के निवर्तमान आत्मा अध्यक्ष, जिला समिति के सदस्य और राज्य प्रतिनिधि जितेन्द्र कुमार सिंह, बिदुपुर के हरिवंश नारायण सिंह, महनार के संजय राय, महुआ के महेश प्रसाद सिंह, राजापाकर के प्रभु दयाल सिंह, चेहराकला के शिवचंद्र भगत, सहदेई के शिवकुमार, जंदाहा के पंकज कुमार, हाजीपुर के द्वारिका सहनी, वैशाली के महेंद्र सिंह पटेल, जिला किसान सलाहकार समिति के सदस्य मुशर्रफ खलील, मुकेश कुमार, किरण कुमारी इत्यादि ने नयी कमेटी के गठन में बरती गयी अनियमिता के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन करने की बात कही है।
निवर्तमान अध्यक्षों ने कहा कि कमेटी के गठन में सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। कहा गया है कि न अधिसूचना जारी की गयी और न ही आवेदन मांगे गये। गुपचुप तरीके से नयी कमेटी में एक खास राजनीतिक दल समर्थकों का मनोनयन कर सूची जारी कर दी गई है। जबकि, पूर्व के वर्षों में सलाहकार समिति के गठन करने से पहले अपने -अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने वाले किसानों से आवेदन लिये जाते थे। योग्यता एवं उनके प्रमाण पत्र के आधार पर अध्यक्ष व सदस्यों का चयन किया जाता था। बावजूद इसके वर्तमान में गुपचुप तरीके से सत्ताधारी दल के नेताओं ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आनन -फानन में पदाधिकारियों एवं सदस्यों को मनोनीत कर इसकी सूची जारी कर दी गई।
जबकि, गाईड लाइन में स्पष्ट उल्लेख है कि पहले अधिसूचना जारी कर हर प्रखंड से कोटि वार प्रत्येक प्रक्षेत्र से जुड़े किसानों से आवेदन लेकर जिला आत्मा एवं कृषि कार्यालय को भेजा जाएगा। उसके बाद कमिटी द्वारा ऐसे किसानों का चयन किया जाता था, जो प्रशिक्षित हो, राज्य के अंदर और राज्य के बाहर परिभ्रमण कर प्रशिक्षण लिया हो और साथ ही जिला स्तर पर, राज्य स्तर पर एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो। ऐसे ही किसानों को अध्यक्ष एवं सदस्य के रूप में चयन करना है। पर विडंबना है कि चयन में इन सभी नियमों की अनदेखी की गई है। सभी अध्यक्षों ने कहा कि सरकार यदि वर्तमान कमिटी को भंग नहीं करेगी तो न्यायिक प्रक्रिया में भी जाने की जरूरत होगी तो उसके लिए हम सभी तैयार हैं।
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