पीयूष पांडेय/बड़बिल (ओड़िशा)। वैसे तो ओडिशा प्रांत के क्योंझर जिला में प्राकृतिक रूप से कई पर्यटन स्थल हैं, लेकिन सानघागरा झरना सबसे अच्छी और बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। हर दिन यहां हजारों पर्यटक, चाहे वह यात्रा हो या वानिकी, क्योंझर जिले के साथ-साथ अन्य जिलों और अन्य राज्यों से भी आते हैं।
जानकारी के अनुसार सानघागरा के विभिन्न झड़ना और नौकायन पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां घूमने के लिए पर्यटकों से प्रवेश शुल्क के नाम पर 20 रुपये प्रति व्यक्ति और वाहन पार्किंग के लिए 50 रुपये प्रति वाहन शुल्क लिया जाता है।
हालाँकि, इतना अनुदान मिलने के बावजूद सानघागरा जैसे पर्यटक स्थल में खराब रख रखाव की स्थिति देखी जाती है। बताया जाता हैं कि यहां प्रतिदिन हजारों पर्यटकों से लाखों रुपये वसूलने के बावजूद साफ-सफाई का घोर अभाव है। यह देखा गया है कि मवेशी प्लास्टिक थर्माकोल की पत्तियां खा रही है।
उपयोग की जाने वाली पत्तियों और विभिन्न वस्तुओं को बेचने वाले दुकानदारों और उनका उपयोग करने वाले पर्यटकों द्वारा प्लास्टिक और कागज को इधर-उधर फैला दिया जाता है। यह गाय-भैंसों के लिए भी यह हानिकारक है। आसपास फैले कूड़े-कचरे से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इसका जिम्मेदार कौन है? न तो प्रशासन और न ही आने वाले पर्यटक।
यहाँ प्रशासन शुल्क उगाही में पूरी तरह से चूस्त है, लेकिन साफ-सफाई में पूरी तरह सुस्त। स्वच्छता की निगरानी में जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। इस तरह के कूड़े को देखकर आने वाले पर्यटक दिल से सरकार और प्रशासन को खूब कोसते है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि स्वच्छ भारत और स्वच्छ ओडिशा सिर्फ दीवारों और कागज पर सिमटा नजर आ रहा है। पर्यावरण और स्वच्छता की सुरक्षा के लिए प्रशासन और सरकार को बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
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