पीएम ने 370 करोड़ की लागत से बने एफजीडी प्लांट का किया ऑनलाइन उद्घघाटन

राजेश कुमार/बोकारो थर्मल (बोकारो)। देश के प्रधानमंत्री (पीएम) नरेंद्र मोदी ने एक मार्च को अपने झारखंड दौरा के क्रम में धनबाद आगमन पर कई विकास कार्यों का ऑनलाइन उद्घाटन किया।

इस क्रम में पीएम ने बोकारो जिला के हद में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) बोकारो थर्मल की 500 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाले ए प्लांट में कोयला से सल्फर को अलग करने को लेकर बनाये गये (प्रदूषण नियंत्रक प्लांट) एफजीडी प्लांट का ऑनलाइन उद्घाटन किया।

इस अवसर पर ऑनलाइन उद्घाटन को लेकर डीवीसी की बोकारो थर्मल प्लांट में पूरी तैयारी की गई थी। साथ हीं यहां समारोह आयोजित की गई थी। इस अवसर पर प्लांट में कार्यरत अधिकारियों एवं कामगारों में भी काफी उत्साह देखा गया।

जानकारी के अनुसार इस फ्लू गैस डी-सलफाराइजेसन (एफजीडी) प्लांट निर्माण में लगभग 370 करोड़ रुपये की लागत लगी थी। जिसे पूरा करने में लगभग 3 वर्ष लगे है। निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 2021 के अप्रैल माह में शुरुआत की गयी थी।

बताया जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने एक मार्च को अपराह्न बारह बजकर दो मिनट पर इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान डीवीसी एवं निर्माण कार्य करनेवाली कोलकाता की कंपनी टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड तथा नार्थ कोरिया की कंपनी केसी कॉटरेल इंडिया के सभी अधिकारी, अभियंता व कामगारों ने ताली बजाकर स्वागत किया।

उद्घाटन पूर्व प्लांट में आयोजित कार्यक्रम का दीप जलाकर डीवीसी कोलकाता के इडी (फ्युल) तरुण कुमार, बोकारो थर्मल के वरीय महाप्रबंधक सह परियोजन प्रधान आनंद मोहन प्रसाद, कोडरमा के एचओपी दिलीप कुमार सिंह, चंद्रपुरा के एचओपी मनोज कुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया।

इस दौरान एफजीडी के वरीय महाप्रबंधक एसएन प्रसाद, जीएम (ओएंडएम) एस भट्टाचार्य, जीएम (कॉमन सर्विसेज) एस भद्रा, टेक्नो कंपनी के आरसी अग्रवाल, सव्यसाची चौधरी, अमरेश चौधरी, उपानंदा दास, केसी कॉटरेल के चू हूनसांग, हवान इनसूंग, शीन सूजी, डिप्टी प्रेसिडेंट सुदीप भट्टाचार्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर स्वागत भाषण परियोजना प्रधान आनंद मोहन प्रसाद ने देते हुए कहा कि यह डीवीसी के स्वर्णिम इतिहास में अत्यधिक खुशी का पल है। इडी फ्यूल ने कहा कि एफजीडी प्लांट का निर्माण होने के बाद कोयला में जो सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा रहती है, और उससे जो उत्सर्जन होता है। उससे मानव स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच सकता है। यह पर्यावरण को भी खराब करता है।

उन्होंने बताया कि भारतीय कोयले में सल्फर की मात्रा 0.25 से 0.5 प्रतिशत तक होती है। आयातित कोयले में यह मात्र 0.6 प्रतिशत से अधिक होती है। कहा कि एसओ टू के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप अम्लीय वर्षा होता है। कहा कि एफजीडी प्लांट निर्माण से ना सिर्फ कोयला से एसओ टू को अलग किया जा सकेगा, बल्कि इससे जिप्सम का भी निर्माण होगा। जिसका उपयोग सीमेंट के निर्माण सहित कई प्रकार के उपयोगों में किया जा सकेगा।

इस अवसर पर बताया गया कि 7 दिसंबर 2015 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए सख्त पर्यावरण मानकों की शुरुआत की थी। इसके तहत एसओ टू के मानक को 100 मिलीग्राम (एमजी) तक रखना था। उसको पूरा करने के लिए एफजीडी का निर्माण किया गया है।

बताया गया कि एफजीडी प्लांट में प्रतिदिन 192 एमटी लाईम स्टोन की खपत होगी, जिससे 336 एमटी जिप्सम निकलेगा। कहा गया कि जिप्सम का उपयोग को लेकर काफी व्यापक बाजार है।

इस अवसर पर बोकारो थर्मल थाना प्रभारी सैलेंद्र कुमार सिंह, एसबीआई बोकारो थर्मल शाखा प्रबंधक सुभाष कुमार, एचआर सुनिल कुमार महतो, नदीम अख़्तर, शाहिद अकरम, रामलाल पासवान, बालेश्वर यादव आदि गणमान्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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