दहशत के साये में रहने को मजबूर हैं कुरैशीनगर की जनता

फिर पहाड़ी खिसकने के आसार

मुश्ताक खान /मुंबई। करीब तीन सप्ताह पहले कुरैशीनगर (Qureshi Nagar) के महताब चाल में चट्टान खिसकने से 6 झोपड़ों को भारी नुकसान हुआ था। इस हादसे में एक बुजुर्ग महिला सहित दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद कुरैशीनगर की जनता दहशत के साये में रहने को मजबूर हैं। अब बारिश का आभास होते ही यहां के लोग अपने घरों को छोड़ कर दूर हट जाते हैं। यहां के रहिवासियों को डर है की फिर पहाड़ी का कोई हिस्सा गिरा तो इस इलाके के हर आंगन में मौत नाचेगी। इस चाल में करीब 35 परिवार रहते हैं।

गौरतलब है की 18 जुलाई के हादसे के बाद यहां के निवासियों ने जिलाधिकारी, मनपा और स्थानीय विधायक से गुहार लगाई है की हम सभी को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करा दें। ताकि हर पल खौफ से निजात मिले। इसके अलावा रहिवासियों ने मांग की है कि 18 जुलाई को हुए इस हादसे का मलबा अभी तक ज्यों का त्यों पड़ा है। जबकि घटना स्थल पर जिलाधिकारी मनपा और म्हाडा के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय नगरसेविका और विधायक भी जायजा ले चुके हैं। अब उसी स्थान पर फिर से पहाड़ी खिसकने के आसार हैं।

इसे देखते हुए स्थानीय लोगों ने मनपा व म्हाडा के अधिकारियों से कहीं सुरक्षित स्थान पर शिफ्टिंग कराने की गुहार लगाई है। पिछले हादसे में घायल हुए मो. साबिर शेख ने बताया की मैं जिलाधिकारी और मनपा के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हूं। इसके बाद भी अभी तक पहले का मलबा जस का तस पड़ा है। करीब तीन सप्ताह गुजरने के बाद भी कुरैशीनगर की जनता का सुध लेने वाला कोई नहीं है।

बताया जाता है की कुर्ला पूर्व के कसाईवाडा स्थित कुरैशीनगर के बिस्मिल्लाह महताब चाल, गुलजार होटल के सामने रूम नंबर 5 और 6 के अलावा अन्य झोपड़ों को भी भारी नुकसान हुआ था। करीब तीन सप्ताह से पड़े महताब चाल के मलबे को हटाने के मुद्दे पर मनपा द्वारा कोई पहल नहीं की गई है। जिसके कारण कुरैशीनगर के लोग संभावित अधिकारियों से गुहार लगाते फिर रहे हैं।

बता दें कि इस चाल में 2006 में भी बड़ा हादसा हुआ था। उस हादसे के बाद 18 जुलाई 2021 की दूसरी घटना में एक चार साल के बच्चे का सर फटा व करीब 80 साल की जैबुन निसा को अदुरूनी चोटें आई थीं। इसके अलावा साबिर के बड़े भाई के हाथ और पैरों में कुल 25 टांके व उनके पैर में सात टांके लगे थे। उक्त हादसे के कारण कुरैशीनगर की जनता खौफ के साये में जीने को मजबूर है।

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