दलित-गरीबों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है कर्ज
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा की बढ़ती महंगाई का मुकाबला करने को लोग खासकर महिलाएं महाजनी कर्ज, समूह एवं माईक्रो फाईनेन्स कंपनी के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं।
एक कर्ज चुकाने को दूसरा, तीसरा कर्ज लेना पड़ रहा है। रोज की कमाई ब्याज में देना पड़ रहा है। गहना, जमीन, माल- मवेशी तक बेचना पड़ता है। इसे चुकाने को कर्जदार कुछ भी करने को तैयार रहता है।
भाकपा माले समस्तीपुर जिला (Samastipur District) स्थाई समिति सदस्य सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने एक संक्षिप्त सर्वे के आधार पर इसकी जानकारी देते हुए 7 जून को कहा कि शहर के विवेक- विहार मुहल्ला में महाजनी एवं समूह के कर्ज चुकाने को 3 आदमी की रोज की कमाई से ब्याज भरना भी असंभव रहा।
अंततः उसे अपने घर की 10 धूर जमीन बेचना पड़ा। फिर भी कर्ज बना हुआ है। बाकी के 10 धूर में बना घर भी बिकने की स्थिति में है। मोहनपुर रोड में कर्ज लेकर जमीन खरीदकर घर बनाने वाले अपनी जीवन की पूरी कमाई दांव पर लगा दिया, फिर भी मकान नहीं बच सका।
माले नेता ने जिला (District) के हद में ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं समूह से लोन उठाती हैं। उसका शुरूआती ब्याज 2 प्रतिशत भरती हैं। ड्यूज गिर जाने पर 7-8 प्रतिशत की दर तक उन्हें ब्याज भरना पड़ता है।
एक समूह से ब्याज पर पैसा लेकर दूसरे की भरपाई। दूसरा समूह से ब्याज पर पैसा उठाकर तीसरे की भरपाई, फिर इसके बाद अधिभार चुकाने को गहना, मालजाल, जमीन तक गवां बैठती है।
उन्होंने शहर के विवेक- विहार मुहल्ला स्थित माईक्रो फाईनेन्स कंपनी में प्रतिदिन सैकड़ों दलित- गरीब महिलाओं को टेम्पू में बैठकर लोन उठाने के लिए आते देखते हैं। उनसे पूछने पर तरह- तरह की ठगी की बातें सुनी जा सकती है।
यहां किराना दुकान में काम करने वाले अजीत बताते हैं कि बगैर उनके जानकारी का उनकी पत्नी को लोन माफिया ने जाल में फंसाकर आधार कार्ड, बैंक खाता ले लिया। विदड्राल पर साईन कराकर 50 हजार रूपये निकासी कर लिया।
उनकी पत्नी 6 महीने तक लोन आने का इंतजार करती रही। छह महीने के बाद जब बैंक से लोन चुकाने का नोटीस आया तब मामले का भंडाफोड़ हुआ। पंचायत बैठी फिर माफिया को लोन चुकाने को कहा गया। उक्त मामला अभी भी चल ही रहा है।
माले नेता सिंह ने बताया कि अभी गाँव- गाँव में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का दौर चल रहा है। यहाँ तक की अब एलआईसी का किस्त ग्राहक से वसूलकर फर्जी रसीद देने का गोरखधंधा जोरों पर है। ताजपुर में एअरपोर्ट पर नौकरी दिलाने, सउदी में फूड पैकेजिंग आदि में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रूपये गिरोह द्वारा ठगा जा रहा है।
फतेहपुर में लोन दिलाने के नाम पर 14- 14 सौ रूपये ठगकर भागने वाले लैपटॉप गिरोह के लोगों को पकड़कर खूब धुनाई किया गया। आवास, राशन कार्ड, पशु शेड, सोख्ता, मातृ वंदना, बाढ़ सहायता आदि के नाम पर पहले से भोले भाले ग्रामीणों को शिकार बनाने का सिलसिला जारी है।
माले नेता सुरेन्द्र ने इसके लिए सरकार (Government) की नीति को जिम्मेवार मानते हुए ऐसे तमाम लोन देने वाले समूह, कंपनी पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने गरीबों की सहायतार्थ पारदर्शी तरीके से जरूरतमंदों को बैंक से लोन दिलाने एवं लोन की गिरफ्त में फंसे गरीबों को लोन माफ करने की मांग की है।
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