एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के जारंगडीह, पेटरवार प्रखंड के खेतको, गोमियां प्रखंड के झिड़की स्थित मस्जिदों तथा ईदगाहो मे 17 जून को ईद-उल-अजहा (कुर्बानी) का नमाज के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर इस्लाम धर्मावलंबीयो द्वारा पवित्र पर्व हर्षोउल्लास और अकीदत के साथ शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। जानकारी के अनुसार जारंगडीह स्थित मस्जिद में जारंगडीह बाजार, बाबू क्वाटर, माइनस क्वार्टर, बारह नंबर, सोलह नंबर, बड़वाबेड़ा, खेतको आदि जगहों से आए नमाजियों ने कुर्बानी की नमाज अदा की।
यहां हाजी हाफिज मोहम्मद जमाल अहमद रजवी इमाम के द्वारा मस्जिद में सुबह 7.30 बजे अकीदत के साथ नमाज पढ़ी गई और वतन में अमन, चैन, शांति की दुआ की गयी।
ज्ञात हो कि इसे ईद-उल-अजहा, कुर्बानी या बकरीद जैसे और कई नामो से जाना जाता है, जिसमें मुस्लिम समाज द्वारा मानव जीवन की रक्षा को लेकर पाक परवर दिगार से अमन, चैन, शांति के लिए विशेष दुआ की जाती है।
इस अवसर पर कुर्बानी की नमाज के बाद तमाम नमाजी एक दूसरे से गले मिलकर एक दूसरे को बकरीद की बधाई भी दी। मौके पर इमाम मोहम्मद जलाल, मौलाना जैनुल आवेदिन, जारंगडीह के सदर सैयद मोहम्मद हारून उर्फ प्रिंस, सचिव मोहम्मद इम्तियाज अंसारी, मोहम्मद शकील, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद असगर, मोहम्मद मनीर, मोहम्मद ताहिर, सनाउल्लाह, मोहम्मद खुर्शीद सहित तमाम मुस्लिम समुदाय के गणमान्य मौजूद थे।
मौके पर इमाम मोहम्मद जमाल ने कहा कि कुर्बानी सभी मुसलमानो का फर्ज है। यह त्यौहार अल्लाह के बारगाह में अपने अजीज जान से प्यारे को कुर्बान करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे इब्राहिम को अपने अजीज को कुर्बान करने का कौल आया, तब उनके पुत्र ने अपने पिता से कहा कि अब्बा आपके लिए हम सबसे प्यारे हैं।
पुत्र ने कहा कि आप अपने आंखो पर पट्टी लगा ले ताकि हमको कुर्बान करते समय आपका हांथ नहीं कांपे। इब्राहिम ने ऐसा हीं किया। उन्होंने अपने पुत्र के गले पर छुरा चलाया, वैसे ही आकाशवाणी हुई कि ऐ खुदा के सच्चे बंदे, तुम्हारी कुर्बानी खुदा ने कुबूल की है। जब उन्होंने आंखो से पट्टी खोला तो अपने पुत्र को हँसता हुआ पाया, जबकि कुर्बानी तुम्बा नामक जानवर की हुई।
सैयद मोहम्मद हारून उर्फ प्रिंस ने कहा कि यह त्यौहार आपसी भाईचारा और एकता बनाये रखने के लिए मनाया जाता है। जबकि सनाउल्लाह ने कहा कि यह त्यौहार अपने अजीज को कुर्बान करने, अपने अंदर के ईर्ष्या, द्वेष आदि को कुर्बान करने की सिख देता है। ईद-उल-अजहा के पाक मौके पर खेतको, झिड़की आदि ईदगाहो में नमाजियों ने नमाज अदा की तथा प्रसाद पाया।
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