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बंदरों के आतंक से मरीज, डॉक्टर, स्कूली बच्चे व शहरवासी परेशान

सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में सेल के किरीबुरू-मेघाहातुबुरु आवासीय क्षेत्रों में बंदरों के आतंक से सेलकर्मी, स्कूली बच्चे, आम जनता के बाद अब किरीबुरु-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल के चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ से लेकर मरीज तक परेशान है।

बंदरों का आतंक इस कदर हावी है कि सभी सेलकर्मी अपने-अपने घरों, स्कूल प्रबंधन क्लास रुम व अस्पताल प्रबंधन अस्पताल की खिड़कियों में जाली लगा रहें हैं। बंदरो का आतंक इस कदर हावी है कि यहां के रहिवासी अपने दरवाजों को बंद रखते हैं, ताकि बंदर घर के अंदर प्रवेश नहीं कर सके।

बताया जाता है कि बंदर घर में घुसकर फ्रीज को भी खोलकर उसमें रखे खाने-पीने का समान ले भाग रहे हैं। बंदरों को अगर कोई भगाने का प्रयास करता है तो वह काटने को दौड़ पड़ते हैं। बंदरों को भगाने के लिए अब रहिवासी अपने पास गुलेल रख रहे हैं। इससे वह बंदरों को डराकर भगाने की कोशिश करते हैं।

बंदरो का समूह क्लास रुम से बच्चों की टिफीन बॉक्स लेकर भाग जाते हैं। ये बंदर शहर की बिजली, पानी, पाईप लाईन के साथ-साथ घरों के समानों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सेल अस्पताल किरीबुरू के मरीज वार्ड तक अब यह बंदर दरवाजे के रास्ते घुस जा रहे हैं।

मरीजों के खाने-पीने का समान लेकर चंपत हो जा रहे हैं। इनके भय व आतंक से चिकित्सा कर्मी व मरीज तक आतंकित है। वे डंडा लेकर रात में भी ड्यूटी करने को मजबूर हैं। अब तक शहर के दर्जनों रहिवासियों को बंदर अपना शिकार बना चुके हैं।

मजदूर संगठन के पदाधिकारी सेल प्रबंधन से बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की कई बार मांग कर चुके हैं। बताया जाता है कि बंदरो का समूह सेलकर्मियों के आवास के छत में लगे एस्बेस्टस सीट को भी उछल-कूद कर तोड़ दे रहे हैं।

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