निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पेरेंट्स एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

निजी स्कूलों को लूट की छूट चरम सीमा पर-महेंद्र राय

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। एक समय था जब बोकारो को एजुकेशन हब के रूप में पहचान था। आज बोकारो लुटेरा हब बनकर रह गया है। बोकारो के स्कूलों में कॉपी किताब नए सिलेबस के नाम पर पैसों का खेल बदस्तूर जारी है। री एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से स्कूलों द्वारा अतिरिक्त उगाही का काम किया जा रहा है।

झारखंड अभिभावक संघ निजी स्कूलो की मनमानी के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संघ के बोकारो जिलाध्यक्ष महेंद्र राय ने 28 मार्च को पत्रकारों से कहा कि निजी स्कूलों को लूट की छूट मिली है। इसलिए ना जिला प्रशासन, ना शिक्षा विभाग ही निजी स्कूलो की मनमानी पर अंकुश लगा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 2017 से शिक्षा नियमावली लागू है, लेकिन बोकारो जिला मे इस नियमावली को दरकिनार कर निजी स्कूल प्रबंधन सरकार के साथ साथ जिला प्रशासन को भी दरकिनार कर लूट रहे हैं। जिसके कारण बोकारो के सभी अभिभावक त्रस्त और पस्त हैं। न जाने कितने वर्षों से इस तरह से पढ़ाई और शिक्षा के नाम पर स्कूलों द्वारा अवैध वसूली का काम किया जा रहा है।

राय ने कहा कि बोकारो में स्थित श्रीअयप्पा पब्लिक स्कूल, चिन्मया विद्यालय, डीपीएस स्कूल, डीएवी, हॉली क्रॉस, संत जेवियर स्कूल, जीजीपीएस स्कूल और कई नामी गिरामी बड़े स्कूलों द्वारा नए सिलेबस, नई ड्रेस एवं री एडमिशन के नाम पर पैसों की वसूली की जा रही है। हर साल फीस की भी बढ़ोतरी कर दी जाती है।

लेट फाइन के नाम पर स्कूलों द्वारा अभिभावकों से फाइन के रूप में पैसा ली जाती है। बोकारो का शिक्षा इतना निम्न स्तर पर पहुंच गया है कि यहां के अभिभावकों को बच्चों को शिक्षा मुहैया करना बहुत ही कठिन होता जा रहा है। कहा कि प्रत्येक वर्ष इस मुद्दे को लेकर न जाने कितनी बार आवाज उठाई गई है। बावजूद इसके कहीं न कहीं अधिकारियों द्वारा एवं स्कूलों के पहुंच को लेकर बात को हर बार दबा दिया जाता है, जिससे अभिभावकों को आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलना पड़ता है।

राय ने कहा कि बोकारो के उपरोक्त स्कूलों में एडमिशन कराना इतना कठिन होता है कि अगर किसी कारणवश बच्चों का नर्सरी से कक्षा एक तक में एडमिशन सेशन में नहीं हो पाया तो उसे अगले साल तक इंतजार करना पड़ता है। एडमिशन के नाम पर एक फार्म का पांच सौ से दो हजार रुपया तक ली जाती है। राय ने कहा कि बोकारो को एक समय शिक्षा का हब कहा जाता था, अब लुटेरों का हब कहा जाने लगा है।

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