प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। एकबार फिर जंगली हाथियों के झुंड के बोकारो जिला (Bokaro District) के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली जंगलो में लौट आने की चर्चा ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार बीते 16 नवंबर की रात वन विभाग एवं हाथी भगाओ टीम द्वारा जंगली हाथियों के झुंड को लंबे समय से बंद पड़ी सीसीएल की अंगवाली खदान क्षेत्र से हटाने स्थानीय घुटियाटांड, आदि।
सिंगारबेड़ा तथा फुसरो के कई इलाके में दहशत फैलाने के बाद 17 नवंबर की शाम पेटरवार थाना क्षेत्र के झुंझको मड़ई टोला के निकट, आसना कनारी, डानगाढ़ा के खेतो में धान की फसल को खाते व नष्ट करते रहिवासियों ने देखा। इसकी जानकारी पाते ही समीप के टोले, मुहल्ले के रहिवासियों में दहशत व भय है।
चलकरी दक्षिणी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दुर्गा सोरेन,अंगवाली उत्तरी पंचायत के मुखिया धर्मेंद्र कपरदार से सूचना पाकर पेटरवार रेंज के वन विभाग के वन अधिकारी विजय कुमार, वनकर्मी देवनाथ महतो सहित पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा के एक्सपर्ट भी टीम के साथ झुंझको पहुंचे। टीम ने बताया कि हाथियों की टीम कई समूह में बंट गया है, जिस कारण उन्हें खदेड़ने या भगाने में काफी परेशानी हो रही है।
समीप इलाके या कॉलोनी के रहिवासियों द्वारा पटाखे, बम फोड़े जाने से भी इन्हे भगाने ने दिक्कत होती है। आज रात झुंझको मड़ई टोला सहित सुसारी टोला, हरलोडीह मंदिर टोला, सलगाबारी, बड़कीटांड, ढांगा महुआ, रंगेनी गोड़ा, बोरवापानी टोला के रहिवासी रतजगा करते रहे।घनी आबादी वाला गांव अंगवाली के ग्रामीण भी चैन की नींद नही सो सके। शाम ढलते ही नहर मार्ग, बालू बंकर, सिंगारबेड़ा मार्ग सुना दिखाई देने लगा।
वनरक्षी देवनाथ के अनुसार टीम का प्रयास है कि भटके हाथियों को एक साथ मिलाए, पर रात्रि को काफी दिक्कत हो रही है। दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों का आरोप है कि वन विभाग के आला अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
समाचार लिखे जाने तक टीम द्वारा 28 हाथियों को खोजकर एक जगह कर लिया गया था। कुछ घुटियाटांड़ तथा केंद्रीय अस्पताल के पीछे के नाले में थे। योजना बनी कि दामोदर नदी पार कर रामबिलास स्कूल होते बेरमो रेंज की जंगल मार्ग से गिरिडीह वन प्रक्षेत्र तक ले जाने की।
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