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बैतरणी नदी तट रामतीर्थ में सांस्कृतिक कार्यक्रम व् गंगा आरती का आयोजन

भगवान राम ने वनवास के दौरान वैतरणी नदी तट पर किया था विश्राम-सोनाराम सिंकू

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में जगन्नाथपुर प्रखंड के रामेश्वर धाम बैतरणी नदी तट पर रामतीर्थ में 14 जनवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया।

मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यहां जगन्नाथपुर विधायक सह उप मुख्य सचेतक (सत्तारूढ़ दल) सोनाराम सिंकु और पश्चिमी सिंहभूम जिला चाईबासा उपायुक्त सहित जिला प्रशासन शामिल रहा। साथ में वरिष्ठ कांग्रेसी मायाधर बेहरा व अन्य दर्जनों शामिल हुए। मकर संक्रांति पर्व के मौके पर बैतरणी नदी तट पर स्थित मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ ने आस्था की डुबकी से माहौल को भक्तिमय बना दिया।

मकर संक्रांति पर रामतीर्थ धाम को श्रद्धालुओं द्वारा सज-धज कर तैयार किया गया। श्रद्धालुओं के लिए यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित रामतीर्थ धाम में विशाल धार्मिक मेला आयोजित किया गया। सुबह वैतरणी नदी में पवित्र डुबकी लगाने के बाद भक्त रामेश्वर शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना किया।

संध्या समय वैतरणी तट पर भव्य गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो मेले का प्रमुख आकर्षण रहा। झारखंड सरकार और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस मेले में लाखों श्रद्धालु सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां (झारखंड) तथा ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज व सुंदरगढ़ जिलों से पहुंचे।

उक्त तथ्यों को जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु ने बताते हुए कहा कि मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान वैतरणी नदी तट पर विश्राम किया था। यहां उनके पदचिह्न और खड़ाऊं मिले थे तथा उन्होंने स्वयं हाथों से शिवलिंग स्थापित किया था। इसी विश्वास से यहां रामेश्वर शिव मंदिर की स्थापना की गयी। भक्त यहां बेलपत्र, भांग और दूध चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के अलावा हर सोमवार, पूरे श्रावण मास, शिवरात्रि व विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना होती है।

चार मंदिरों का पावन धाम रामतीर्थ में एक ही स्थान पर चार प्रमुख मंदिर स्थित है। जिसमें रामेश्वर शिव मंदिर: मुख्य आकर्षण, जहां भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा होती है। सीताराम मंदिर: माता सीता और भगवान राम को समर्पित। भगवान जगन्नाथ मंदिर: ओडिशा की परंपरा से जुड़ा।हनुमान मंदिर: भक्तों की शक्ति का प्रतीक। स्नान और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रामतीर्थ में स्नान घाट, घाट से मंदिर तक सीढ़ियां, महिला स्नान घर, विश्राम के लिए चबूतरा व मंडप जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि यहां आयोजित मेले के दौरान प्रशासन पूरी मुस्तैदी से तैनात रहता है। हालांकि, वैतरणी नदी की धारा तेज है, गहराई असमान (कहीं-कहीं 15-20 फीट) और चट्टानों से पानी भंवर बन जाता है। इसलिए सावधानी बरतते हुए केवल चिन्हित स्नान घाट पर ही स्नान करनी चाहिए। मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर वैतरणी नदी के तट पर स्थित रामतीर्थ मंदिर स्थान देवगाँव के मंदिर कमिटि एवं जिला प्रशासन के सहयोग से मकर संक्रान्ति मेला का आयोजित की गई।

इस पावन अवसर पर माँ वैतरणी (आदि गंगा) नदी तट पर संध्या महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सच्चाई है कि रामतीर्थ मंदिर परिसर के अंदर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन के साथ-साथ विधायक सिंकू द्वारा की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए विधायक सिंकू ने कहा कि शिव की भक्ति में ही शक्ति है। प्रत्येक श्रद्धालुओं को पूरे श्रद्धा एवं विश्वास के साथ भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए।

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