ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। तेनुघाट जेल में 18 जुलाई को एक ऑनलाइन जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Vedio conferencing) के द्वारा व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से किया गया।
उक्त जानकारी अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार समिति के प्रभारी सचिव सह प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दीपक कुमार साहू ने दी।
उन्होंने बताया कि तेनुघाट जेल में आयोजित इस ऑनलाइन या आभासी जेल अदालत में वादों के निष्पादन हेतु एक बेंच का गठन किया गया था। जिसके सदस्य एसीजेएम विशाल गौरव, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दीपक कुमार साहू एवं अधिवक्ता रीतेश कुमार जयसवाल थे।
उक्त जेल अदालत में एक भी मामले का निष्पादन नहीं हुआ। साथ ही तेनुघाट जेल में एक आभासी या ऑनलाइन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से वीडियो कॉन्फ्रंसिंग के माध्यम से किया गया।
जागरूकता कार्यक्रम में तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम विशाल गौरव द्वारा जेल के बंदियो को जेल अधिनियम के बारे में जानकारियां दी और बताया कि जेल में उन्हें किस प्रकार की सुविधाएं दी जाती है।
इस अवसर पर सबसे पहले बंदियों को कोरोना से बचाव के तरीके बताएं गये। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दीपक कुमार साहू ने बंदियों को दहेज उत्पीड़न से संबंधित जानकारियां देते हुए कहा गया कि दहेज लेना और देना दोनों कानूनी अपराध है। इसलिए दहेज प्रथा से हमें दूर रहना चाहिए।
एनआई एक्ट की जानकारी देते हुए बताया गया कि लोगों को पैसे की जरूरत पड़ती है तो वह अपने किसी दोस्त मित्र से उधार ले लेते हैं। इसके बदले चेक साइन कर उन्हें दे देते हैं। इस कारण उन्हें काफी परेशानियां होती है। जो उधार लिए हैं अगर नहीं चुकाते हैं, तो उनके विरुद्ध मुकदमा होता है।
उन्हें कर्ज लिया रकम चुकाना पड़ता है। मगर उन्हें उससे ज्यादा दुगना तक रकम चुकाना पड़ सकता है। इसलिए किसी से भी उधार लेकर चेक देते हैं तो जरूर कोशिश करें कि उनका चेक बाउंस नही हो। वरना उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। बंदियों को कानूनी जानकारी देते समय जेल अधीक्षक अनिमेष चौधरी, जेलर अरुण कुमार शर्मा आदि मौजूद थे।
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