महकस कहानिका द्वारा युपी अध्याय पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। महकस कहानिका द्वारा 2 जुलाई की संध्या युपी अध्याय पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महकस कहानिका के युपी सह केंद्रीय मिडिया प्रभारी सुधीर श्रीवास्तव के जन्म दिन और कवि ओमप्रकाश श्रीवास्तव के वैवाहिक वर्षगांठ को सेलिब्रेट करना था।

यूपी अध्याय के ऑनलाइन कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सन्तोष श्रीवास्तव को आमंत्रित किया गया था। विशिष्ठ अतिथि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय संयोजक कहानिका दुबई जे के मिश्रा और प्रधान संपादक श्याम कुंवर भारती ने सभा अध्यक्ष के रूप में भाग लिया। मंच का संचालन रवेंद्र पाल सिंह रसिक ने किया।

सरस्वती वन्दना सुनील श्रीवास्तव ‘बेचारा’, गणेश वंदना संतोष तोषनीवाल, संपादक रजनी प्रभा और देवी गीत श्याम कुंवर भारती ने प्रस्तुत किया। जबकि स्वागत भाषण प्रभारी उप संपादक ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधान संपादक श्याम कुंवर भारती ने कहानिका पत्रिका के कार्यक्रमो के बारे में बताते हुए कहा कि अगला ऑफलाइन कवि सम्मेलन चित्रकूट यूपी में आगामी 23 जुलाई को आयोजित किया जाना है। इससे पहले मध्यप्रदेश के मैहर, इंदौर, युपी के अयोध्या तथा झारखंड के बोकारो और रांची में सफल आयोजन हो चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रकाशन के रूप में लघु कथा सांझा संकलन और कहानी संकलन पुस्तक का प्रकाशन हो चुका है। कहानी संकलन पुस्तक का विमोचन चित्रकूट में होगा। पत्रिका के हार्ड कॉपी का प्रकाशन तीन महीने बाद होने जा रहा है, जिसकी सूचना शीघ्र ही दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कवि सम्मेलन प्रत्येक महीने सभी राज्यो के नाम से चलने वाले अध्यायों के द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय संयोजक जे के मिश्रा ने कहानिका के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शीघ्र ही दुबई और मारीसस में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। उक्त आयोजन में भाग लेने वाले सभी कवियों ने सुधीर श्रीवास्तव और ओमप्रकश श्रीवास्तव को कविता के माध्यम से साधुवाद दिया और एक से बढ़कर एक काव्य पाठ कर अयोजन को भव्य और यादगार बना दिया।

काव्य पाठ में मुख्य रूप से राम नरेश सिंह, शंभू प्रसाद, सुनील श्रीवास्तव ‘बेचारा’, उषा कंसल, रवेंद्र पाल सिंह रसिक, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, जे के मिश्रा और श्याम कुंवर भारती के अलावा दर्जनों कवियों ने भाग लिया। अंत में सुधीर श्रीवास्तव द्वारा अतिथियों और कवियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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