रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड +2 शिक्षक संघ जिला इकाई बोकारो द्वारा शिक्षक साधारण नहीं होता विषय पर एक ऑनलाइन परिचर्चा का सफल आयोजन किया गया। इस विचार-विमर्श कार्यक्रम में बोकारो जिले के विभिन्न विद्यालयों के अनेक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय पर अपने-अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की भूमिका, जिम्मेदारियों और समाज निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करना था।
इस अवसर पर प्लस टू शिक्षक संघ के अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज के निर्माण की आधारशिला हैं। उनकी भूमिका बहुआयामी होती है। वे मार्गदर्शक, प्रेरक, अनुशासक और संस्कारदाता के रूप में विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के सबसे सम्मानित व्यक्तियों में शामिल हैं। उनके योगदान का मूल्यांकन शब्दों में संभव नहीं है।
संघ के सचिव डॉ अवनीश कुमार झा ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के ज्ञान और संस्कृति का सम्मान है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जितनी प्रशंसा के अधिकारी हैं, उतनी प्रशंसा भी उनके योगदान की तुलना में कम है। संरक्षक डॉ अजय कुमार पाठक ने शिक्षकों को समाज का मेरुदंड बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक सशक्त और जागरूक होंगे, तो समाज और राष्ट्र भी सुदृढ़ होगा। उपाध्यक्ष कौशल कुमार मुखर्जी ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की महती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक शिक्षक ही छात्र के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उसे सही दिशा प्रदान करता है।
प्रांतीय गुणात्मक शिक्षा समिति सदस्य धनंजय कुमार ने कहा कि जब शिक्षक स्वयं को पहचान लेते हैं और अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हैं, तब वे चमत्कारी परिणाम उत्पन्न करने की शक्ति रखते हैं। प्रवक्ता-सह-मीडिया प्रभारी गौरव कुमार दुबे ने कहा कि शिक्षक आजीवन विद्यार्थियों के विचार, चरित्र और व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं। उनका प्रभाव पीढ़ियों तक बना रहता है। वरिष्ठ शिक्षक दिनेश चंद्र ने कहा कि हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी शिक्षक का मार्गदर्शन अवश्य होता है।
यही कारण है कि शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता की संज्ञा दी जाती है। शिक्षिका-सह-कवयित्री डॉ राखी बरनवाल ने कहा कि शिक्षक कभी साधारण नहीं होते। उन्होंने आचार्य चाणक्य का उदाहरण देते हुए बताया कि चाणक्य ने अपनी शिक्षा और दूर दृष्टि के बल पर एक साधारण बालक चंद्रगुप्त को सम्राट बना दिया।
देवाशीष साहनी ने कहा कि विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार करने में शिक्षकों की अग्रणी भूमिका होती है। वहीं विकास कुमार ने आचार्य चाणक्य की उक्ति को दोहराते हुए कहा कि शिक्षक कभी साधारण नहीं होते। प्रलय और निर्माण दोनों उनकी गोद में खेलते हैं।
परिचर्चा के संचालन में संयुक्त सचिव राजेश कुमार विश्वकर्मा एवं डॉ शक्ति पद महतो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर श्वेता कुमारी उपाध्याय, नीति कुमारी, डॉ रणजीत कुमार झा, मुकेश प्रियंकर, हरे कृष्ण बागभट्ट, सृष्टि धर महतो, नितेश कुमार सोनी, कृपा शंकर महतो, राकेश कुमार सिन्हा समेत अनेक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी अपने विचार रखे और कार्यक्रम की सराहना की। अंत में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की बौद्धिक परिचर्चाएं शिक्षकों के आत्म मंथन और समाज में उनकी भूमिका को सशक्त बनाने का माध्यम हैं। समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।
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