रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की टीम द्वारा महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के नेतृत्व में लगातार दूसरे दिन 16 जून को स्वतंत्रता सेनानियों के जन्म स्थलों से पावन मिट्टी एकत्रित किया गया।
जानकारी के अनुसार बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड स्थित ओरदाना पंचायत के खैराजारा गांव रहिवासी अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी स्व. जटा शंकर महतो एवं उनकी पत्नी अमर स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीया अलवतीया देवी के घर तथा इसी प्रखंड के पेटरवार रहिवासी अमर स्वतंत्रता सेनानी स्व. काशी नाथ मुंडा के घर पहुंच कर उनके परिजनों से स्वतंत्रता सेनानियों के घर की पवित्र मिट्टी एकत्रित किया गया।
साथ ही टीम द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर उनके निवास स्थल के पास आम फलदार पौधों का रोपण कर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बताया जाता है कि ओरदाना पंचायत के खैराजारा रहिवासी स्वतंत्रता सेनानी स्व. जटा शंकर महतो एवं उनकी पत्नी स्व. अलवतीया देवी के परिजनों ने स्पष्ट बताया कि सरकार द्वारा उनके परिवार को कोई भी विशेष सुविधा नहीं प्रदान की गई है।
मजदूरी और खेतों में कामकर वे जीवन यापन कर रहे हैं। कहा कि हमें गर्व है कि हमारे पूर्वज स्वतंत्रता सेनानी रहे तथा देश के प्रति अपना सर्वस्व धन और जीवन न्योछावर कर दिए। मगर, सरकार द्वारा इनको जो सम्मान मिलना चाहिए वह आज तक नहीं मिल पाया है। कहा गया कि दस वर्ष पूर्व जब वर्तमान गोमिया विधायक सह मंत्री झारखंड सरकार योगेन्द्र महतो विधायक थे तो इनके नाम पर मूर्ति निर्माण हेतु शिलान्यास किया था।
साथ ही स्मृति भवन के निर्माण का भी वादा किया था। पर यह सब आज तक अधूरा ही है। रहिवासियों के मन में अत्यंत आक्रोश भी है कि नेताजी को इधर झांकने की भी फुर्सत नहीं है। परिजनों तथा ग्रामवासियों की सरकार से मांग है कि स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर यहां के स्कूल का नाम कर दिया जाय तथा पेटरवार से खैराजारा होते हुए तेनुघाट तक जाने वाली सड़क का नाम जटाशंकर अलवतीया पथ कर दिया जाय।

स्वतंत्रता सेनानियों के निवास स्थल को इनके स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जाय। परिजनों के रहने हेतु सरकार पक्का मकान बनाकर दे और इनकी आर्थिक दयनीय हालात में सुधार किया जाय। कहा गया कि सरकार द्वारा समय समय पर परिजनों की सुध भी ली जाए। ज्ञात हो कि, पेटरवार रहिवासी अमर स्वतंत्रता सेनानी स्व. काशी नाथ मुंडा के परिजनों की भी आर्थिक और सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय है तथा मजदूरी एवं दूसरे के घरों में काम कर परिवार चल रहा है।
इनके परिजनों के मन में दर्द है कि सरकार द्वारा कभी भी सुध नहीं ली जाती है। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सरकार का रवैया निश्चित ही असंवेदनशील लगा। परिजनों की सरकार से मांग रही है कि इनके घर के बगल में स्थित मिडिल स्कूल का नाम स्वतंत्रता सेनानी के नाम से कर दिया जाए और इनकी एक प्रतिमा बनाकर इनके नाम से कोई स्मृति भवन का निर्माण कराया जाए।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की टीम ने ऐसा महसूस किया कि सरकार और जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों को न सम्मान दिया जा रहा है और न ही सरकार अपने कर्तव्यों का ही पालन कर रही है। संस्थान की टीम में शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, जिला परिषद सदस्य प्रह्लाद महतो, वीरेंद्र चौबे, लक्ष्मण शर्मा, प्रेमन गिरि, गोपाल महतो, रविकांत कुमार, मुक्तेश्वर बास्के, कमलेश टुडू, कमली देवी, चमेली, सुमित्रा, संजू, संटू, राम सिंह, नीरज कुमार मुंडा सहित कई गणमान्य एवं स्वस्तंत्रता सेनानियों के परिजन उपस्थित थे।
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