बाबा हरिहरनाथ सहित विभिन्न शिवालयों में किया गया जलाभिषेक
श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में मौन धारण कर मांगी देश और दुनिया की खैरियत
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पवित्र माघ मास के कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को लाखों श्रद्धालुओं ने सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र तीर्थ के सोनपुर स्थित काली घाट, पहलेजा धाम, गंगा गंडक संगम के बाबा घाट सहित विभिन्न घाटों पर मौन रहकर पवित्र डुबकी लगायी।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गंगा तट और नारायणी घाटों पर दान -पुण्य भी किया। उसके बाद सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर, काली घाट स्थित विभिन्न शिवालयों में माथा टेक कर बाबा से देश और दुनिया की खैरियत मांगी।
जानकारी के अनुसार मौनी अमावस्या के अवसर पर सोनपुर में महास्नान पर्व पर बाबा हरिहरनाथ के दरबार में दर्शन-पूजन के लिए 18 जनवरी की सुबह चार बजे से हीं लंबी कतार लगी रही। महास्नान पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि, हर्षण और शिव वास योग के दुर्लभ संयोग में गंगा तथा नारायणी नदी में डुबकी लगाने के लिए सुदूरवर्ती जिलों के श्रद्धालुओं की भीड़ बीते 17 जनवरी की शाम से ही नारायणी नदी तट के सवाईच घाट, दीपोत्सव घाट, भारत वंदना घाट, कष्टहरिया घाट, श्रीगजेन्द्र मोक्ष घाट, कालीघाट पहुंचने लगी थी।

इस अवसर पर स्नान, दान का अपना अलग ही महात्म्य है। लेकिन स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर मौन रह पुण्यकाल में मोक्ष दायिनी गंगा में डुबकी लगाने से जन्म – जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। अमावस के साथ शिव वास योग बनने के कारण रविवार को बाबा हरिहरनाथ का कई श्रद्धावानों ने रुद्राभिषेक किया, वहीं हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और पूजन वन्दन कर आशीर्वाद मांगा।
माघ कृष्णपक्ष अमावस्या की संध्या कालीन श्रृंगार दिव्य दर्शनम्
माघ कृष्ण पक्ष अमावस्या की संध्या कालीन बेला में बाबा हरिहरनाथ के दिव्य श्रृंगार दर्शन एवं आरती में श्रद्धालु उमड़ पड़े। बाबा हरिहरनाथ मन्दिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री, पवन शास्त्री तथा नन्द बाबा ने बताया कि पूरे साल में 12 अमावस्या होती है। इसमें से मौनी अमावस्या का अपना खास महत्व है।
कहा कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा और गंडकी नारायणी, पवित्र नदियों मे स्नान और दान-पुण्य के बाद भगवान विष्णु, शिव, माता भवानी का पूजन बहुत हीं पुण्य लाभ प्राप्त कराता है। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या पर हरिहर की पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पितरों को शांति मिलती है। यह दिन आत्म – मंथन और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। वहीं, नमामि गंगे घाट पर नारायणी महाआरती का आयोजन किया गया।
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