लॉकडाउन पर सीएम ने कहा, थोड़ी तकलीफ सहन कर लीजिए

एस.पी.सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) ने विभिन्न समाचार माध्यमों से संक्रमण कम होने की सूचनाओं का हवाला देकर आम लोगों से अपील की है। सीएम ने कहा कि अभी खतरा टला नहीं है। अभी और अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए।
सीएम हेमंत सोरेन ने बीते 19 मई को ट्वीट कर कहा कि पिछले एक वर्ष से हमने देखा कि जब-जब हमने इस महामारी को हल्के में लिया, तब-तब इसने दोगुनी ताकत से वापस आकर तबाही मचाई है। फिलहाल खुश होने के बदले हमें और सतर्क रहना है। उन्होंने कहा कि सभी झारखंडियों के सहयोग से इस महामारी को धीरे-धीरे काबू में कर रहे हैं। अब लड़ाई ग्रामीण क्षेत्रों को महामारी से बचाने की है। इसलिए सरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सर्वे और टेस्ट कर रही है। ताकि संक्रमण का तेजी से पता लगाकर उसे काबू में किया जा सके। सीएम सोरेन ने कहा कि सरकार कोरोना के तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी बहुत पहले शुरू कर चुकी है। विशेषज्ञों से राय लेकर हम आनेवाले समय में संक्रमण के खतरे को कम करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह मे पाबंदियां बढ़ने से आम लोगों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन यह आपके अपनों और पूरे राज्य के लिए जरूरी है। उन्होंने आम लोगों को हुई असुविधा के लिए खेद प्रकट किया है।
राज्य सरकार कोरोना की दूसरी लहर से सीख लेकर इसकी संभावित तीसरी लहर से पहले सभी प्रकार की तैयारी पुख्ता करना चाहती है। विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने इसे लेकर 19 मई को कोविड टास्क फोर्स के साथ बैठक कर इससे निपटने को लेकर रणनीति तैयार की। बैठक में प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि तीसरी लहर से निपटने के लिए किस तरह तथा कितने संसाधन की आवश्यकता राज्य सरकार को होगी। कितने मानव संसाधन की आवश्यकता पड़ेगी। खासकर इस लहर से बच्चों को बचाने को लेकर टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों से राय ली गई। इसमें शिशु कोविड वार्ड बनाने से लेकर शिशु रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति पर विशेष जोर दिया गया। अपर मुख्य सचिव के अनुसार बच्चों को इस संक्रमण से बचाने से लेकर उनके संक्रमण की स्थिति में क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं, इसपर चर्चा हुई। खासकर नवजात बच्चों को इससे बचाने पर विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में तय हुआ कि इसके लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की जाएंगी जो पहले से ही अपना काम करेंगी। बच्चों की कोरोना जांच तथा उनके इलाज के लिए किस तरह की दवा व उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी आदि पर भी बैठक में चर्चा हुई। यदि तीसरी लहर दूसरी लहर से अधिक खतरनाक हुआ तो इससे निपटने के लिए क्या इंतजाम पहले से होने चाहिए, इसपर भी विशेषज्ञ चिकित्सकों से सुझाव लिए गए। बैठक में ब्लैक फंगस की वर्तमान समस्या से निपटने पर भी चर्चा हुई। बैठक में अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला, कोविड टास्क फोर्स के डा. प्रदीप भट्टाचार्य, डा. प्रभात कुमार, डा. निशिथ एक्का आदि शामिल थे।

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