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कार्तिक पूर्णिमा को लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा-गंडक संगम पर लगायी आस्था की डुबकी

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर 5 नवंबर को गंगा गंडक संगम पर स्थित वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के ऐतिहासिक कोनहारा घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।

हालांकि 6 नवंबर को यहां होनेवाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार पिछले वर्ष की तुलना में स्नानार्थियों की संख्या कम रही। इसे लेकर बीते 4 नवंबर की दोपहर से ही गंगा स्नान करने वाले यात्रियों का हाजीपुर में आना शुरू हो गया और ऐतिहासिक कौनहारा घाट पर मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी और नेपाल से आए तीर्थ यात्रियों का जमावड़ा लग गया।

बताया जाता है कि बीते 4 नवंबर की अर्धरात्रि 12 बजे से तंत्र साधना वाले तांत्रिक और ओझा गुणी ने स्नान किया और कौनहारा घाट पर इन तांत्रिको द्वारा भूत खेली का दृश्य देखने को मिला। वहीं 5 नवंबर के प्रातः 4 बजे साधु संतों के स्नान के साथ गंगा स्नान को आए तीर्थ यात्रियों ने इस पवित्र स्थान में स्नान में भाग लिया। पुलिस स्टाफ बल को हाजीपुर के नदी घाटों को स्नानार्थियों के लिए सजाया गया था तथा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ स्काउट एंड गाइड के कार्यकर्ता भी लगे रहे।

बताया जाता है कि इस अवसर पर हाजीपुर में तो किसी तरह की कोई दुर्घटना नहीं हुई, लेकिन जिले के बिदुपुर के अमीर घाट पर गंगा नदी में गंगा स्नान करने आए तीन युवक नदी में डूबने लगे, जिनमें से दो को बचा लिया गया। जबकि, एक युवक को नहीं बचाया जा सका। आज हाजीपुर के कौनहारा घाट से लेकर जिले के तमाम स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। हरि गोविंद के गीत और जयकारे से क्षेत्र का पूरा माहौल गोविंदमय हो गया।

एक अनुमान के मुताबिक वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर और सारण जिला के हद में सोनपुर को मिलाकर हरिहर क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और गंडक नदी में आस्था की डुबकी लगई। ध्यान देने योग्य है कि देश के प्रमुख तीर्थ स्थानों में एक हरिपुर (हाजीपुर) के मोक्षधाम कौनहारा घाट का धार्मिक व पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व होने के कारण हर साल कार्तिक पूर्णिमा स्नान को लेकर सर्वाधिक भीड़ इसी घाट पर होती है।

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु और साधु-संत हरिहर क्षेत्र में देवोत्थान एकादशी से ही आने लगे थे। वही 5 नवंबर की देर रात तक लाखों श्रद्धालुओं ने यहां के विभिन्न घाटों पर डेरा जमा लिया था। मध्य रात बीतने के बाद घाटों पर श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगानी शुरु कर दी। हाजीपुर नगर के कौनहारा घाट, नमामि गंगे घाट, महेश्वर घाट, कौशल्या घाट, सीढ़ी घाट, पुराना गंडक पुल घाट, चित्रगुप्त घाट, तंगौल घाट, बालादास घाट समेत अन्य घाटों के अलावे गंडक नदी के उस पार सोनपुर के काली घाट, गजेंद्र मोक्ष मंदिर घाट, साधु गाछी घाट, पुल घाट समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान-ध्यान किया।

चौकस रहा जिला प्रशासन, घाटों पर रही कड़ी निगरानी

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए वैशाली व् सारण जिला प्रशासन ने मुकम्मल इंतजाम कर रखा था। विभिन्न नदी घाटों से लेकर सड़कों तक श्रद्धालुओं के सैलाब में प्रशासन की नजर चप्पे-चप्पे पर थी। हाजीपुर नगर के कौनहारा घाट पर बनाये गये जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम से सारी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। जिला प्रशासन के आलाधिकारियों ने व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिहाज से प्रमुख घाटों पर वाच टावर बनाये गये थे। सभी टावरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये थे। ड्रोन से भी निगरानी की जा रही थी। सभी प्रमुख स्थानों पर दंडाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती थी।

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