एस.पी.सक्सेना/पटना(बिहार)। बिहार सरकार (Bihar government) के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा नुक्कड़ नाटक ओ री चिरैयाँ का मंचन 20 दिसंबर की संध्या बिहार की राजधानी पटना में किया गया।
उक्त जानकारी देते हुए कलाकार संघ के सचिव मनीष महिवाल ने बताया कि उक्त नाटक का कथासार कुछ इस प्रकार है जिसमें एक स्याह अंधेरी रात में उपजा सत्य प्रकाश के अलोकित होने से पहले अनेकों-अनेक उधेड़बुन एवं अनिश्चय की स्थिति अंततः वातावरण में छोड़ जाता है। वृद्ध, पति, पत्नी और रंजन संपूर्णता की ओर अग्रसर होते हैं, जहां संबंधों की अनेकों तहे दृष्टिगोचर होती है। जिज्ञासा प्रबल होकर दमित इच्छाओं की पूर्ति को आतुर होती है। मन को छूती है। आंदोलित करती हैं। सारी रात प्रश्न उत्तर और प्रतिउत्तर के बीच सपनों को यथार्थ रूप देने को प्रतिबद्ध होता दिखता है।
महिवाल के अनुसार अव्यवस्थित कमरा मानव मन के बिम्ब को प्रतिबिम्बित कर उसे सहेजने और संजोने का एक प्रयास मात्र है और सफलता निश्चित।
…”ओ री चिरैया” नाटक में घर और समाज हर जगह लड़कियों के छीनते बचपन को दिखाया गया है। बचपन से ही इन्हें लड़का – लड़की के भेद भाव को सहना, अपने सपनों से समझौता करना सिखाया जाता है। घर से लड़ कर अगर ये बाहर भी निकलती है तो छेड़खानी, बलात्कार एसिड अटैक, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा आदि का शिकार होना पड़ता है सिर्फ लड़कियों को क्यों? लोगों की कुंठित मानसिकता कब बदलेगी? प्रस्तुत नाटक सवाल करता है सभी से। आख़िर कब तक लड़कियों को ही बर्दाश्त करना पड़ेगा, छूने तक, नोचने तक या जिस्म के टुकड़े- टुकड़े होने तक?
प्रस्तुत नाटक में स्त्री की भूमिका में अदिति सिंह, वृद्ध की भूमिका में आदिल रशीद तथा
पुरुष की भूमिका में अर्पित मिश्रा जबकि संगीत संयोजन राहुल कुमार, सहयोग रंधीर कुमार ‘समीर’, प्रकाश परिकल्पना रौशन कुमार, मंच परिकल्पना प्रबोध विश्वकर्मा, प्रस्तुति नियंत्रक शशांक शेखर, नाटककार बादल सरकार अनुवादक प्रतिभा अग्रवाल
प्रस्तुति विश्वा, पटना, परिकल्पना एवं निर्देशन राजेश राजा, संगीत एवं परिकल्पना रोहित चंद्रा, हारमोनियम राजीव रॉय, लेखन एवं निर्देशन रूबी खातून के अलावा मंच कलाकार रूबी खातून, लक्ष्मी राजपूत, फिज़ा निगार, अंशिका कुमारी, विकी कुमार, राहुल रंजन, शिवम् पांडेय, सचिन कुमार, रवि कपूर आदि ने बेहतरीन ढंग से अपने-अपने किरदारों को निभाया।
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