प्रहरी संवाददाता/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड सरकार द्वारा आगामी 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सारंडा के वन क्षेत्र 576 वर्ग मीटर को सेंचुरी बनाने के आहूत सुनवाई के ग्रामीणों का छोटानगरा एवं रोवांम में पूरजोर विरोध किया गया है।
उक्त बातें पश्चिम सिंहभूम के पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने 6 अक्टूबर को कही। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि सत्ता पक्ष के राज्य सरकार द्वारा सारंड़ा मे सेंचुरी बनाने का कोई भी दृढ निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य की हेमंत सरकार कान में तेल डाल कर सोयी हुई है। स्थिति ऐसा बनाया जा रहा कि सारंडा को बचाना है तो सेंचुरी ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र द्वारा क्षेत्र के ग्रामीण आदिवासी समुदाय को गुमराह किया जा रहा है।
पुर्व सांसद ने कहा कि क्षेत्र के आदिवासियों के रोजी- रोटी की व्यवस्था के बजाय पूर्व से ही आदिवासियो का अहित करके कोई भी कार्य नहीं किया जाना चाहिए।पर्यावरण रक्षा निश्चित रूप सें रहिवासियों के लिए जरूरी है, लेकिन ऐसा प्रयास होना चाहिए कि कहीं सें भी अदिवासियों का अहित न हो। सूचनार्थ कहा जा सकता है कि खडकाई बांध इचाडैंप के लिए क्यों नहीं ग्रामीणों की राय ली जा रही है? इसके लिए भी सत्ता पक्ष द्वारा ग्रामीणों से निर्णय लिया जाना चाहिए। सच्चाई यह है कि सारंडा क्षेत्र के साल वनों की हरियाली और प्राकृतिक झरनों को अगर बचाया जाए तो यह इलाका भी देश–विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
![]()













Leave a Reply