नौकरी का लालच देकर किसानों से औने-पौने अधिग्रहित जमीन बेच दिये जाने की चर्चा
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। जिला मुख्यालय समस्तीपुर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर सरायरंजन प्रखंड के गंगापुर स्थित अलता चौर में किसानों से 6-7 बीघा जमीन अधिग्रहण व् करोड़ों रूपये खर्च कर तामझाम के साथ तत्कालीन कोयला एवं इस्पात मंत्री रामविलास पासवान द्वारा शिलान्यास के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का निर्माण नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
यह 8वां अजूबा है, जब शिलान्यास के बाद जमीन समेत कॉलेज गायब हो गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान एवं समस्तीपुर लोजपा सांसद शांभवी चौधरी से इस मामले की जिम्मेवारी लेते हुए जमीन समेत आईटीआई कॉलेज गायब होने की घटना पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भाकपा माले समस्तीपुर जिला स्थायी समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने की है।
माले नेता सिंह ने एक नवंबर को मामले का विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि गंगापुर आईटीआई कॉलेज निर्माण की फिरकी में फंसकर अपनी जमीन गंवाने वाले स्थानीय रहिवासी जीबछ पासवान आदि की असामयिक मौत हो गई। दर्जनों किसान बर्बाद हो गये। शिलान्यास कार्य में सरकारी राशि करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिया गया। कहा कि शिलान्यास स्थल पर आज तक न कॉलेज बना, न कॉलेज की जमीन है और न ही किसानों को उनका जमीन वापस किया गया।
बल्कि अधिग्रहित जमीन को निजी हाथों में बेच दिया गया। अब कॉलेज की जमीन में निजी बिल्डिंग निर्माण कार्य जारी है। अब दूर-दूर तक आईटीआई कॉलेज स्थापना की संभावना नहीं दिखता है। उपरोक्त संपूर्ण मामले पर जदयू-भाजपा की नीतीश सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग माले नेता ने की है। उन्होंने लोजपा (आर) के समस्तीपुर सांसद शांभवी चौधरी जो विकास कार्यों का झड़ी लगा देने का स्वांग भरती है से भी उक्त मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
विदित हो कि तत्कालीन कोयला एवं इस्पात मंत्री रामविलास पासवान द्वारा वर्ष 2008 में लाव-लश्कर, तामझाम के साथ समस्तीपुर के सरायरंजन प्रखंड के गंगापुर स्थित अलता चौर में दर्जनों किसानों से उनके परिजनों को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा कर औने-पौने दाम पर जमीन मोर्गेज कराकर करोड़ों रूपये खर्च कर विभागीय अधिकारियों के साथ आईटीआई कॉलेज निर्माण का शिलान्यास किया गया था। कॉलेज आज तक नहीं बना, न ही किसानों को उनके जमीन वापस किया गया। अलबत्ता उक्त जमीन को रामविलास पासवान के क़रीबी रसुखदार नेता द्वारा निजी हाथों बेच दिए जाने की चर्चा है।
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