मोटी सैलरी का लालच देकर भेज रहे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली
संतोष कुमार झा/ मुजफ्फरपुर (बिहार)। उत्तर बिहार में पंजाब-हरियाणा (Punjab-Hariyana) के फैक्ट्री संचालकों के एजेंट फिर से सक्रिय हो गए हैं। धक्के खाकर, ट्रकों पर लदकर और पैदल अपने घर लौटे मजदूरों को पहले से अधिक पारिश्रमिक तथा सुविधाओं का प्रलोभन देकर एक बार फिर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली भेजने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले दस दिनों से रात के अंधेरे में रोजाना मजदूरों को बाहर ले जाने के लिए बसें खुल रहीं हैं।
सूत्रो के अनुसार मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में मीनापुर के गंगटी गांव से 8 जून की देर रात एक बस 50 मजदूरों को लेकर लुधियाना गई। सीतामढ़ी जिला के हद में बैरगनिया के परसौनी गांव से भी 8 जून की देर रात एक बस चार दर्जन मजदूरों को लेकर पंजाब रवाना हो गई है। मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड के धनुखी नुनिया टोला के मेघनाथ ने बताया कि उसके पास 7 जून को एक एजेंट आया था। पंजाब की फैक्ट्री में 11 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा किए तो मेघनाथ समेत सात मजदूर तैयार हो गया। मेघनाथ ने बताया कि पहले नौ हजार रुपये पारिश्रमिक दिया जाता था। मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के कोदरिया गांव से 6 जून को 25 मजदूर पंजाब रवाना हुए थे। मजदूर उमेश राम ने बताया कि साहूकार का कर्ज 25 हजार हो गया है।
भोजपुर के प्रवासी मजदूर अच्छी पगार का ऑफर मिलने के बावजूद फिलहाल वापस नहीं लौटने के मूड में हैं। वहीं जिनको कोई विकल्प नहीं दिख रहा है वे जाने की सोचने लगे हैं। केवटियां गांव के रहिवासी जयराम कुमार को हरियाणा में महज 8 हजार रुपये पगार मिलता था। अब कंपनी मालिक की ओर से 20 हजार रुपये प्रति माह देने का ऑफर मिला है। साथ ही ट्रेन का टिकट भी मिल गया है। जयकुमार की तरह कई ऐसे हैं जिन्हें कंपनियों की ओर से अच्छा ऑफर दिया जा रहा है।बेगूसराय लौटे मजदूरों को दोगुनी से अधिक मजदूरी देने का प्रलोभन देकर काम पर बुलाया जा रहा है।
कैमूर के कुछ प्रवासी काम पर लौट रहे हैं। कुछ गांव में ही काम की तलाश कर परिवार की परवरिश करेंगे। गोपालगंज में चार-पांच दिनों से काफी संख्या में मजदूर बसों व बाहर की कंपनियों की ओर से भेजी गई गाड़ियों से जा रहे हैं। यूपी-बिहार के बॉर्डर के बलथरी चेकपोस्ट पर तैनात अधिकारियों के अनुसार हर रोज चार से पांच सौ की संख्या में मजदूर लौट रहे हैं।जहानाबाद में करीब 20 हजार से अधिक अप्रवासी मजदूर आए हैं। वे फिलहाल घर पर ही रहना चाह रहे हैं। भारथु गांव निवासी अर्जुन मोची, धामापुर गांव निवासी सुरेश मांझी ने बताया कि सूरत में काम करते थे। वहां कोरोना को लेकर कंपनी बंद कर दी गई थी।फिलहाल सूरत जाने का उनका इरादा नहीं है।
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