साभार/नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए लाल और नीली बत्ती पर 1 मई से लगाई गई रोक का असर अभी से दिखने लगा है। बुधवार को कैबिनेट के फैसले के ठीक बाद एक के बाद एक केंद्रीय मंत्रियों ने अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती हटानी शुरू कर दी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गिरिराज सिंह, महेश शर्मा, विजय गोयल के साथ ही बीजेपी शासित महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी अपनी कार से लाल बत्ती हटवा दी।
Maharashtra CM @Dev_Fadnavis removes the #RedBeacon from his car immediately as the GoI decided to take this step to end #vipculture pic.twitter.com/CB1ucbx5XA
— CMO Maharashtra (@CMOMaharashtra) April 19, 2017
बिहार के नवादा से सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जैसे ही इस फैसले के बारे में जानकारी मिली, उन्होंने अपनी गाड़ी से खुद ही लाल बत्ती हटा दी। बिहार के शेखपुरा के बरबीघा दौरे पर गए सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्री सिंह ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह फैसला स्वागतयोग्य है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘जनता और नेताओं में कोई फर्क नहीं होना चाहिए। लाल और पीली बत्ती को खत्म किया जाना चाहिए।’ कैबिनेट के इस निर्णय के बाद केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री मंत्री महेश शर्मा और केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने भी अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती हटा ली है।
गौरतलब है कि काफी वक्त से सड़क परिवहन मंत्रालय में इसपर काम चल रहा था। इससे पहले, पीएमओ ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई थी। यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय में लगभग डेढ़ साल से लंबित था। इस दौरान पीएमओ ने पूरे मामले पर कैबिनेट सेक्रटरी सहित कई बड़े अधिकारियों से चर्चा की थी। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने लाल बत्ती वाली गाड़ियों के इस्तेमाल के मुद्दे पर कई सीनियर मंत्रियों से चर्चा की, जिसके बाद उन्होंने पीएमओ को कई विकल्प दिए थे।
Removed 'Lal Batti' from my car. PM @narendramodi ji's decision is a welcome step towards reaffirming our belief in #EveryoneVIPinNewIndia. pic.twitter.com/ThEhgfrQr7
— Smriti Z Irani (@smritiirani) April 19, 2017
इन विकल्पों में एक यह था कि लाल बत्तियों वाली गाड़ी का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद किया जाए। दूसरा विकल्प यह कि संवैधानिक पदों पर बैठे 5 लोगों को ही इसके इस्तेमाल का अधिकार हो। इन 5 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा स्पीकर शामिल हों। हालांकि, पीएम ने किसी को भी रियायत न देने का फैसला किया।
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